रायबरेली। जिले से होकर निकले गंगा एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह निर्माण कार्य में सुविधा के लिए कट बनाए गए हैं। यह कट अब हादसों का सबब बन रहे हैं। इन कटों से लोग अक्सर एक्सप्रेसवे पर चढ़कर फर्राटा भरते हैं। कई लोग रील बनाकर सोशल मीडिया में वायरल करते हैं।
रविवार रात जगतपुर क्षेत्र में हुए हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे का अभी लोकार्पण नहीं हुआ है। इसके बाद भी लोग इस पर फर्राटा भर रहे हैं। एक्सप्रेसवे निर्माण में सुविधा के लिए 60 से ज्यादा कट बने हुए हैं। इनसे निर्माण सामग्री जाती है। यह कट लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। लोग बेरोकटोक एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरते देखते जा सकते हैं। आसपास गांव के लोग भी उत्सुकता से इस पर चले जाते हैं। जबकि इस पर पैदल चलने की अनुमति नहीं है।
प्रदेश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे अपने निर्माण के आखिरी चरण में है। जिले में गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 79 किमी है। अभी एक्सप्रेसवे पर सर्विसरोड, सीसीटीवी कैमरे, लाइटिंग कराने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। मार्च के आखिरी सप्ताह में लोकार्पण की तैयारी चल रही है।
राजमार्ग और हाईवे पर बनाए जाने हैं कट
गंगा एक्सप्रेसवे के ऊपर चढ़ने के लिए मुंशीगंज-डलमऊ, रायबरेली-बांदा हाईवे, रायबरेली-प्रयागराज हाईवे पर चढ़ने और उतरने के लिए कट होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में जगह-जगह पर कट बने हैं। इन कटों को कार्यदायी एजेंसी ने अपनी सुविधा के लिए बनाए हैं।
संपर्क मार्गों और रेलवे क्रासिंग पर बनाए गए पुल
जिले के लोगों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ना न पड़े, इसके लिए संपर्क मार्गों पर पुलों का निर्माण कराया गया है। इसमें दो रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं। एक्सप्रेसवे के बीच पड़ने वाले गांव के लिंक मार्ग के लिए 12 अंडरपास बनाए गए हैं। गंगा एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्ड लगाए जा चुके हैं। कुछ स्थानों पर सर्विस रोड का निर्माण चल रहा है। एक्सप्रेसवे मेरठ के पास हस्तिनापुर से शुरू होकर प्रयागराज में समाप्त होगा।
कमियों को किया जा रहा दूर
गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण को चार ग्रुपों में बांटा गया है। हमारे पास चौथे ग्रुप में रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज है। इस बीच की दूरी करीब 156 किमी है। सड़क निर्माण, बैरिकेडिंग का काम पूरा हो गया है। साइन बोर्ड भी लग गए हैं। जो कमियां हैं, उन्हें दूर कराया जा रहा है। लोकार्पण से पहले अवैध कट बंद किए जाएंगे। स्थानीय लोगों को इस पर अभी चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई है।
- विजय कुमार, एक्सईएन यूपीडा प्रयागराज