सतांव (रायबरेली)। राजनगर अटौरा बुजुर्ग स्थित आधारशिला काॅलेज में अमेठी जल बिरादरी की ओर से मंगलवार को आयोजित जल संचयन व पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि मानव सभ्यता के विकास में नदियों का सबसे अहम योगदान रहा है, लेकिन आज विकास की अंधी दौड़ में इन नदियों के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
उन्होंने वर्षा का जल संचयन कर गिरते भूगर्भ जल स्तर को उठाने और जल स्वराज से ग्राम स्वराज के लिए लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया। अमेठी जल बिरादरी ने 27 अप्रैल से दो मई 2025 तक कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी व बाराबंकी में जल संरक्षण व संचयन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जल साक्षरता यात्रा शुरू की है।
गोष्ठी के आयोजक पूर्व डीआईजी डॉ. तहसीलदार सिंह ने डॉ. राजेंद्र सिंह व उनकी टीम का स्वागत किया। बैसवारा डिग्री काॅलेज लालगंज के पूर्व प्राचार्य बैजनाथ विश्वकर्मा ने कहा कि जल बिन जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। डॉ. विश्वकर्मा ने कहा कि जल संरक्षण के बिना भूजल स्तर में सुधार संभव नहीं है।
जल संचयन गोष्ठी को रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह, गांधी शांति प्रतिष्ठान के पूर्व निदेशक रमेशचंद्र शर्मा, आकाशवाणी लखनऊ की पूर्व निदेशक मीनू खरे, पूर्व कुलसचिव पीएन प्रसाद ने भी संबोधित किया। डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने गीत के माध्यम से लोगों की खूब तालियां बटोरी। उन्होंने कहा कि नदियां धीरे बहो, कौन सुनेगा तेरी आह नदियां धीरे बहो...। गोष्ठी में दयानंद बछरावां डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. रामनरेश, काॅलेज के ओएसडी गिरिजा शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।