फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन साल में भी पूरा न हुआ अस्पताल को 24 घंटे बिजली का सपना

विज्ञापन
रायबरेली में जिला पुरुष अस्पताल का मुख्य भवन। - फोटो : RAIBARAILY
विज्ञापन
रायबरेली। जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली का सपना टूट चुका है। तीन साल पहले से अस्पताल को स्वतंत्र फीडर से दिनरात बिजली की आपूर्ति हो रही थी, लेकिन भूमिगत केबल के खराब होने के बाद मरीज बिजली कटौती से आए दिन जूझ रहे हैं। ऊपर से जेनरेटर न चलने से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो रही हैं।
विज्ञापन

इलाज के साथ ही जांच की सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। जिला अस्पताल प्रशासन ने तीन साल में अब तक स्वतंत्र फीडर से बिजली आपूर्ति को बहाल नहीं करवा पाया है। इसी का नतीजा है कि आए दिन अस्पताल को घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सांसद सोनिया गांधी के प्रयास से जिला अस्पताल में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए स्वतंत्र फीडर की स्थापना कराई गई थी।
स्वतंत्र फीडर से बिजली की आपूर्ति होने के बाद अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही थी। जांच के साथ ही अन्य सेवाएं सुचारु रूप से चल रही थीं।
विज्ञापन

तीन साल पहले स्वतंत्र फीडर की भूमिगत केबल खराब हो गई थी, जिसके बाद भी बिजली कटौती की समस्या से जिला अस्पताल जूझ रहा है। जेनरेटर न चलने और बिजली कटने के कारण जांच के साथ ही वार्डों में अन्य स्वास्थ्य सेवाएं आए दिन बदहाल हो रही हैं।
तीन साल में भी अस्पताल प्रशासन ने निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए प्रयास नहीं किया। इसी कारण अस्पताल को आए दिन घटनाओं और विवादों का सामना करना पड़ रहा है।
ओवरहेड केबल के काम को भी लग गया बट्टा
पूर्व डीएम के प्रयास से जिला अस्पताल को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए ओवरहेड लाइन बिछाने का प्रयास शुरू किया था, लेकिन यह काम भी आज तक पूरा नहीं हो सका है। विवाद के कारण पॉवर कार्पोरेशन ने इस काम को बंद कर दिया है। जिला अस्पताल को इंदिरा नगर पावर हाउस से बिजली आपूर्ति हो रही है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिशासी अभियंता ओपी सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल के स्वतंत्र फीडर की भूमिगत केबल तीन साल से खराब है। ओवरहेड लाइन का काम शुरू कराया गया था, लेकिन महानंदपुर के पास लोगों के विरोध के कारण काम बंद हो गया। इंदिरा नगर पावर हाउस से जिला अस्पताल को सामान्य उपभोक्ताओं की तरह बिजली दी जा रही है।
जेनरेटर चलाने के नाम पर नहीं मिल रही फूटी कौड़ी
एक ओर जहां जिला अस्पताल को निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं हो रही है, वहीं जेनरेटर के नाम पर अस्पताल को फूटी कौड़ी नहीं मिल पा रही है। बिजली के अभाव में ऑक्सीजन प्लांटों का संचालन न होने से मरीजों को प्राणवायु की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक ब्लड की तमाम जांचे भी समय से मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। सीटी स्कैन एक्सरे आदि जांचें भी बिजली कटौती की भेंट आए दिन चढ़ जाती हैं। गर्मी में वार्डों में भर्ती मरीजों को भी बेहाल होना पड़ रहा है।
किसी अस्पताल को जेनरेटर के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है, लेकिन रोगी कल्याण समिति सहित अन्य मदों में व्यवस्था करके जेनरेटर का संचालन कराया जा सकता है। इसके लिए सभी सीएचसी पीएचसी को निर्देशित किया गया है।
विज्ञापन

डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें