रायबरेली। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना एक साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। आठ रूटों पर निजी बसों के संचालन की स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक एक भी बस नहीं चली। इससे गांवों को शहर से जोड़ने और ग्रामीणों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मंशा अधूरी है।
योजना के तहत जिले की सभी 980 ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने की तैयारी थी। आवेदन मिलने के बाद करीब सात माह पहले डीएम ने आठ रूटों पर बसें चलाने की स्वीकृति दी थी। इनमें दलीपुर से भोजपुर, सरेनी होते हुए रायबरेली, परसदेपुर से सलोन होते हुए रायबरेली, बनी से छातोह होते हुए रायबरेली, महारानीगंज से खीरों और सतांव होते हुए रायबरेली, सलोन से डीह और परसदेपुर होते हुए रायबरेली, पूरे राई से छतोह और परसदेपुर होते हुए रायबरेली, करौली दमा से डलमऊ होते हुए रायबरेली तथा बेड़ारू से शिवगढ़ होते हुए रायबरेली मार्ग शामिल हैं।
डीएम ने स्वीकृति के बाद 15 दिन में बसों का संचालन शुरू कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक किसी भी रूट पर सेवा शुरू नहीं हुई। वाहन मालिक बसों का संचालन लखनऊ या कानपुर तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। टैक्स आदि को लेकर असमंजस के चलते वे संचालन से पीछे हट रहे हैं।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आदित्य प्रकाश ने बताया कि आठ रूटों पर निजी बसों के संचालन की स्वीकृति मिली थी। वाहन मालिकों से बातचीत की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द बसें चलवाने का प्रयास किया जा रहा है।