1000 और 500 के नोट बंद किए जाने के बाद से सब्जियों के दाम आधे हो गए हैं। इससे जहां लोग खुश हैं वहीं बिक्री कम होने से सब्जी बेचने वाले दुकानदारों के चेहरे पर शिकन आ गई है। हालात ये हैं कि जितनी सब्जी दुकानदार पहले एक दिन में बेचते थे, उतनी सब्जी तीन दिन में भी नहीं बिक पा रही है।
बाहर से भी सब्जी नहीं आ रही है। खास बात ये है कि छुट्टा रुपये और 10 रुपये का सिक्का लेने को लेकर दुकानदारों और ग्राहकों के बीच कहासुनी हो रही है। दुकानदारों की मानें तो अभी कुछ दिन सब्जी मंडी का यही हाल रहेगा। पुराने नोट बंदी से महंगे दाम में सब्जी खरीद रहे लोगों को राहत मिली है।
सब्जी मंडी में पूरे सीजन शिमला मिर्च व परवल बेचने वाले शकील का कहना है कि नोट बंदी के बाद से माल की ब्रिकी व कीमत दोनों कम हो गए हैं। ग्राहक 10 रुपये का सिक्का देते तो हैं, जिस पर वह रुपया ले लेते हैं। पर वापस लौटाने पर खुद ही ग्राहक रुपया नहीं लेते हैं।
फुटकर रुपया न होने से दिक्कत आ रही है। हनीफ कहते हैं कि सब्जी की बिक्री कम हो गई है। सब्जी सस्ती होने के बाद भी ग्राहक नहीं आ रहे हैं। इसकी वजह उनके पास नगदी का न होना है। मिर्च, अदरक व नींबू बेचने वाले अरशद खान कहते हैं कि हरी मिर्च पांच रुपये पाव भी दी जा रही है इसके बावजूद सेल घटकर आधी रह गई है।
लोग 10 रुपये का सिक्का दुकानदारों को तो देते हैं, लेकिन जब ग्राहकों को दो तो वो लेने से मना करते हैं। टमाटर बेचने वाले बुजुर्ग दुकानदार जमील कहते हैं कि जितना माल एक दिन में बिकता था उतना माल तो तीन दिन में भी नहीं बिक रहा है।
सब्जी दो-तीन दिन बाद ही सड़ने लगती है। आमदनी भी काफी कम हो गई है, अब स्थानीय माल ही बेचा जा रहा है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व शत्रुघ्न वैश्य ने कहा कि 10 रुपये का सिक्का पूरी तरह चलन में है। बैंकों से 10 रुपये के नए सिक्के दिए जा रहे हैं।
जो दुकानदार या ग्राहक सिक्का लेने से मना करें तो इसकी सूचना जिला प्रशासन या पुलिस को दी जा सकती है। जिलाधिकारी के स्तर पर भी इस संबंध में आदेश जारी किए गए है। सभी लोग 10 रुपये के सिक्के का लेने-देन करें। ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।