रायबरेली। उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय में आरटीई कानून से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद देशभर के अध्यापकों में नाराजगी बढ़ गई है। इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाई जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी नहीं होने की स्थिति में सेवा से मुक्त करने की शर्त से देशभर के करीब 25 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। अब अपनी आवाज उठाने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को हल्ला बोल किया जाएगा। इसीलिए शुक्रवार को जिलेभर के लगभग एक हजार शिक्षक दिल्ली रवाना हो गए।
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षकों ने मांग की है कि केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत दे, क्योंकि एनसीटीई की 2010 की अधिसूचना में ऐसे शिक्षकों को छूट देने का प्रावधान है। इसी मुद्दे को लेकर टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय शिक्षक रैली आयोजित की जा रही है।
जिला महामंत्री सियाराम सोनकर ने बताया कि रैली में शामिल होने के लिए जिले के शिक्षक ट्रैवल्स बस, निजी वाहन और ट्रेनों से दिल्ली रवाना हो चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से समर बहादुर सिंह, शिवशरण सिंह, शिव कुमार सिंह, मेराज अहमद, रवि श्रीवास्तव, सुरेश सिंह, गौरव युवराज, सुनील यादव, राजेश यादव, उमाशंकर चौधरी, विक्रमादित्य सिंह, सुरेंद्र वर्मा, आशीष चौधरी, राकेश पटेल धर्मेंद्र शर्मा, रमेश, संजीव श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
वहीं प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक खीरों के अध्यक्ष नीरज हंस ने बताया कि शिक्षक शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलन करेंगे। यह प्रदर्शन टीईटी अनिवार्यता की व्यवस्था के विरोध में है। ब्लॉक अध्यक्ष नीरज हंस, ब्लॉक मंत्री दर्शन लाल लोधी, जिला प्रचार मंत्री अनुपम शुक्ला, तहसील प्रभारी विश्वनाथ प्रसाद, जिला उपाध्यक्ष बृजेश पांडेय सहित कई शिक्षक भी मौजूद रहे।
12-रायबरेली से लखनऊ में धरना के लिए रवाना होते शिक्षक। स्रोत-संगठन