फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ज्यादातर केंद्रों पर नहीं जल रहे चूल्हे, नहीं पहुंच रहे लाभार्थी

Mon, 07 Nov 2016 11:37 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
विज्ञापन
रायबरेली में सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र डेडौली में बनता भोजन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
शहर का आंगनबाड़ी केंद्र खतराना प्राइमरी स्कूल के एक कमरे में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र में अपराह्न 11:30 बजे एक भी बच्चा नहीं था। ना ही कोई गर्भवती या धात्री केंद्र में पोषाहार लेने पहुंची। इतना नहीं यहां उसी कमरे में किचन भी है, लेकिन खाना बनाने के लिए खरीदे गए बर्तन बोरे में ही भरे हैं।
विज्ञापन


ऐसे में चूल्हा बुझा है। राशन व ईधन की व्यवस्था होनी हैं। केंद्र पर 58 बच्चे, 9 गर्भवती, 25 धात्री पंजीकृत हैं। केंद्र पर एक साल से सहायिका नहीं हैं। कार्यकर्त्री रुकइया बेगम ने बताया कि दो बच्चे आए थे, लेकिन चले गए।

आंगनबाड़ी केंद्र डिडौली प्रथम ब्लॉक अमावां में दोपहर 12 बजे कार्यकर्त्री संतोष सिंह केंद्र पर मौजूद मिली, लेकिन बच्चे नहीं थे। यहां पर 20 गर्भवती महिलाएं, 17 धात्री व 60 बच्चे पंजीकृत हैं। केंद्र के किचन में सब्जी बनी थी और रोटियां बन रही थी। अगस्त में सुपरवाइजर ने निरीक्षण किया था। यहां जिला कार्यक्रम अधिकारी व सीडीपीओ कभी निरीक्षण करने नहीं आए। केंद्र पर लाभार्थी विनीता ने बताया कि वे केंद्र पर नियमित रूप से आती है।
विज्ञापन


पोषाहार मिलने के साथ टीकाकरण भी हुआ है। दूसरी लाभार्थी रानी ने कहा कि उन्हें केंद्र से पोषाहार मिलता है। पर लाभार्थी केंद्र नहीं आते हैं। डीह ब्लॉक क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र पूरे सभा पर 10 कुपोषित बच्चे व 17 गर्भवती महिलाएं, 68 बच्चे पंजीकृत हैं।

पड़ताल के दौरान यहां पर मौके पर महज छह बच्चे ही मौजूद मिले। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री कृष्णादेवी बच्चों को अच्छर ज्ञान करातीं मिली। सहायिका सुनीता केंद्र पर मौजूद नहीं थी। कार्यकर्त्री कृष्णादेवी का कहना था कि प्रधान ने खाते से हौसला पोषण योजना का पैसा नहीं निकाला, जिससे गर्भवती महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा है।

पूरे गोसाई के केंद्र पर कार्यकर्त्री सुनीता त्रिपाठी व सहायिका निर्मला मौजूद रहीं। यहां 10 गर्भवती व 14 अति कुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चे तो मिले लेकिन गर्भवती महिलाएं नहीं थी। आंगनबाड़ी केंद्र पूरे कनपुरिया में कार्यकर्त्री वीणा देवी व सहायिका रामेश्वरी मौजूद रही। यहां 9 गर्भवती महिलाओं में सिर्फ 5 और 11 कुपोषित बच्चों में से 6 मौजूद थे। 

सीएम के प्राथमिकता वाली हौसला पोषण मिशन योजना की सच्चाई बताने के लिए यह सीन काफी हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ज्यादातर केंद्रों पर चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। जहां पर जल रहे हैं, वहां लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वजह लाभार्थी केंद्र पहुंच ही नहीं रहे हैं। प्रधानोें की तरफ से भी इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यही नहीं सीडीपीओ और सुपरवाइजर भी योजना संचालन में अपने कमीशन तक सीमित हैं।

ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीएम के सपना कैसे परवान चढ़ सकता है। जिले के शिवगढ़, डलमऊ, सतांव, बछरावां, हरचंदपुर, सलोन, डीह समेत ब्लॉक क्षेत्रों में इस योजना का यही हाल है। लापरवाही का यही आलम रहा तो यह योजना महज कागजीकोरम तक सीमित रह जाएगी।

जिला कार्यक्रम अधिकारी मनाेज कुमार का कहना है कि पोषण मिशन योजना को प्रभावी बनाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। निर्देश दिए गए हैं कि मीनू के हिसाब से सभी लाभार्थियों को पोषाहार वितरित किया जाए। यदि इसमें कोई लापरवाही बरत रहा है तो इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें