बछरावां सीएचसी में स्टेमी योजना के तहत वृद्धा मोइना का इलाज करती चिकित्सक।
रायबरेली। जिला अस्पताल समेत जिले के पांच अस्पतालों में शुरू हुई एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इंफ्रक्शन (स्टेमी) केयर योजना से मरीजों को जिंदगी का तोहफा मिला है। बछरावां सीएचसी में हॉर्ट अटैक के बाद सबसे पहले पहुंचे दो मरीजों की जान बचाई गई। एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉक्टरोंं की मदद से सीएचसी के चिकित्सकों जांच व इलाज करके मरीजों को राहत दी गई।
दिल के रोगियों के त्वरित इलाज के लिए सरकार ने हृदयाघात देखभाल परियोजना संचालित की है। इस योजना से जिला अस्पताल के साथ ही बछरावां, ऊंचाहार, सलोन, लालगंज सीएचसी को पहले चरण में शामिल किया गया है। इन अस्पतालों को एसजीपीजीआई लखनऊ से वाट्सपए ग्रुप के माध्यम से जोड़ा गया है। बछरावां सीएचसी में सबसे पहले रामपुर सुदौली की मोइना (73) पत्नी ईश्वरदीन को हॉर्ट अटैक के बाद गंभीर रूप में लाया गया। इसके अलावा महराजगंज निवासी रफीक (65) पुत्र ओवैश को भी गंभीर हालत में बछरावां सीएचसी पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने ईसीजी व अन्य जांच करके रिपोर्ट एसजीपीजीआई लखनऊ के चिकित्सकों को वाट्सपए पर भेजी। चिकित्सीय सलाह मिलने के बाद दोनों मरीजों को इंजेक्शन लगाया गया। दोनो मरीज अब स्वस्थ बताए जा रहे हैं। दोनों को आगे इलाज के लिए एसजीपीजीआई लखनऊ भेजा गया है।
समय से जांच व इलाज से बच सकती जान: डॉ. सलीम
जिला अस्पताल के हॉर्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. सलीम का कहना है कि व्यक्ति को सीने में अचानक से तेज दर्द होने पर यदि वह गोल्डन ऑवर में चिकित्सालय पहुंच जाता है तो उसे थ्रंबोलिसिस प्रक्रिया के तहत एक विशेष प्रकार के इंजेक्शन लगाकर उसकी जान बचाई जा सकती है। बाजार में यह इंजेक्शन काफी महंगा होने के कारण आम लोग लगवा नहीं पाते हैं। परियोजना के तहत पांचों अस्पतालों में इंजेक्शन मुहैया है। यह इंजेक्शन विशेषज्ञ की सलाह पर दिल का दाैरा पड़ने पर मरीजों को लगाया जाता है।
क्या है स्टेमी
स्टेमी (एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इंफ्रक्शन) एक प्रकार का हार्ट अटैक है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति करने वाली मुख्य धमनियों में से एक पूरी तरह से बंद हो जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित हो जाती है।