रायबरेली। 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद दो नर्सिंग होम संचालकों समेत पांच आरोपियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। मामले की विवेचना दरोगा अतुल कुमार को सौंपी गई है। पुलिस नर्सिंग होम संचालकों के बयान भी जल्द दर्ज करेगी। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पहले ही लापरवाही की पुष्टि होने पर नर्सिंग होम को सील किया जा चुका है।
दरअसल, प्रतापगढ़ जिले के पूरे बोधी अगई लालगंज अझारा निवासी शरद कुमार सिंह ने अपनी बच्ची शिवानी को 29 जून को जेल रोड स्थित हॉस्पिटल में टॉन्सिल के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया था। 30 जून को ऑपरेशन से बच्ची की हालत खराब होते ही लखनऊ के एक अस्पताल में कोमा की हालत में भर्ती कराया गया था।
मंगलवार को बच्ची ने दम तोड़ दिया था। बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल को सोमवार को ही सील कर दिया गया था। पिता का आरोप है कि इलाज में बरती गई लापरवाही से बच्ची की जान गई है। सदर कोतवाली प्रभारी शिवशंकर सिंह ने बताया कि पिता की तहरीर पर वेदांता नर्सिंग होम के संचालक डॉ. निशांत सिंह, शाश्वत नर्सिंग होम के संचालक डाॅ. अमित सिंह और शाश्वत नर्सिंग होम के अन्य तीन स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
विवेचना शुरू करा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के अलावा पुलिस अपनी तफ्तीश के आधार पर मामले में कार्रवाई करेगी। आरोपियों के बयान भी कराई जाएंगे।
बेड के पास ऑक्सीजन की व्यवस्था तक नहीं थी
पिता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि बच्ची की हालत बिगड़ने के दौरान बेड के पास ऑक्सीजन तक की व्यवस्था नहीं थी। डॉ. निशांत सिंह बेटी के जल्द ठीक होने का दिलासा देते रहे। कहने के बाद भी लखनऊ रेफर करने में देरी की। यहां तक कि शाश्वत नर्सिंग होम के संचालक डॉ. अमित सिंह तो बच्ची के पास तक नहीं आए। मेरी मदद करने के बजाय डॉ. अमित सिंह अपनी पत्नी के साथ अस्पताल से भागने का प्रयास करने लगे। पीड़ित के मुताबिक ऑपरेशन वाले नर्सिंग होम में वेंटिलेटर और पोस्ट-ऑपरेटिव कक्ष होना आवश्यक है, जो शाश्वत नर्सिंग होम में नहीं है।