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राज्य कर्मियों की हड़ताल से विभागों में लटके ताले

Thu, 11 Aug 2016 12:00 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
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रायबरेली जिला अस्पताल में बुधवार काे प्रदर्शन करतीं नर्सें। - फोटो : अमर उजाला
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वेतन विसंगति समेत विभिन्न मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों ने बुधवार को तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल से विभागों में ताले लटक गए। जनता बेहाल रही। जिला अस्पताल में तीन घंटे तक रोगियों को दवा के लिए तरसना पड़ा।
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निबंधन कार्यालय में पूरे दिन ताला लटकता रहा। इससे 20 लाख का राजस्व प्रभावित हुआ। हड़ताल के समर्थन में उतरी 300 एएनएम ने टीकाकरण का बहिष्कार किया। सभी ने नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की अगुवाई में राज्य कर्मचारी हड़ताल पर रहे। स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से लेकर 11 बजे तक काम नहीं किया। रजिस्ट्रेशन काउंटर, दवा काउंटर, औषधि भंडार और ओपीडी में ताले लटकते रहे। इससे कई लोग तो बिना इलाज कराए ही लौट गए।
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वहीं जिले में तैनात करीब 300 एएनएम टीकाकरण ठप करके आक्रोश जताया। एएनएम के हड़ताल में शामिल होने से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लगने वाले पोलियो, डीपीटी, हेपेटाइटिस, जेई समेत अन्य टीके नहीं लगे।

जिले के दूरदराज इलाकों से जमीनों के रजिस्ट्रेशन संबंधित कार्यों के लिए प्रतिदिन करीब 500 ग्रामीण कलेक्ट्रेट आते हैं, हड़ताल के कारण इन्हें खाली हाथ मुख्यालय से वापस जाना पड़ा। रजिस्ट्री न होने के कारण 20 लाख का राजस्व प्रभावित हुआ।

इसके अलावा डीआरडीए, समाज कल्याण विभाग, गन्ना विभाग, कलेक्ट्रेट के संयुक्त कार्यालय, रजिस्ट्रार कानून गो दफ्तर, संग्रह अमीन दफ्तर समेत अन्य कार्यालयों में भी कर्मचारियों ने कामकाज ठप करके मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रमोद अवस्थी और संरक्षक बीएस सक्सेना ने कहा कि मांगों को लेकर तीन दिन तक हड़ताल चलेगी। इसके बावजूद यदि मांगे पूरी न हुई तो शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाएं भी ठप कर दी जाएगी।

जिलामंत्री रवींद्र कुमार श्रीवास्तव और वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी ने कहा कि कर्मचारियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मौके पर उपाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह, राजेंद्र कुमार चौधरी आदि मौजूद रहे।

जिला अस्पताल में इलाज कराने आए संतराम यादव, दिनेश प्रजापति को बुखार था। दो घंटे से लाइन में खडे़ रहने पर जब पैर दर्द करने लगे तो वह बिना इलाज कराए ही घरों को लौट गए। बुजुर्ग महिला रामावती व सुखाना भी इलाज न होने पर घर चली गई।

इन सबका कहना था कि कभी डॉक्टर कक्ष में नहीं रहते हैं तो कभी हड़ताल हो जाती है। इससे जनता को परेशानी होती है। इसी तरह अन्य विभागों में हड़ताल का खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ा।

परिषद के पदाधिकारियों ने कार्यालयों में जाकर कामकाज बंद कराया। कोषागार समेत अन्य कई दफ्तरों में पदाधिकारियों के सामने तो काम बंद रहा, लेकिन उनके जाते ही कर्मचारियों ने फिर से कामकाज शुरू कर दिया। जिला अस्पताल, सीएमओ दफ्तर और विकास भवन के सामने कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर आक्रोश जताया।

स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी संघ अध्यक्ष जुबलेश कुमार, महामंत्री डीएस अस्थाना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एके पांडेय, कोषाध्यक्ष अंजली सिंह, एएनएम संघ अध्यक्ष सुनीता रानी ने मांगे पूरी किए जाने की मांग की।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सुबह तीन घंटे की हड़ताल रही। महराजगंज सीएचसी में डीके मिश्रा, हरीश श्रीवास्तव, प्रेमा सिंह, गीता आदि ने गेट पर ताला बंद करके सीएचसी में धरना दिया।

कहा कि मांगे पूरी न हुई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। उधर, अमेठी जिले की तिलोई सीएचसी में भी कर्मचारियों ने सुबह आठ से 11 बजे तक दवा, रजिस्ट्रेशन, अल्ट्रासाउंड, ओपीडी में काम नहीं किया। इससे रोगियों को परेशानी उठानी पड़ी। इस मौके पर मायावती, शहनाज बानो, गुरु प्रसाद, दिलीप कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

लालगंज में राजस्व संग्रह अमीन संघ व मातृ शिशु कल्याण संघ की लालगंज शाखा ने धरना दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में मातृ शिशु कल्याण संघ की अध्यक्ष सुनीता रानी मंडल ने बताया कि मांगों को लेकर 12 अगस्त तक धरना जारी रहेगा।

वहीं तहसील परिसर में राजस्व संग्रह अमीन संघ के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव की अगुवाई में धरना दिया गया। अध्यक्ष ने बताया कि 12 अगस्त तक मांगे पूरी न हुई तो 13 अगस्त को लखनऊ के हजरतगंज में विशाल रैली निकाली जाएगी।
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