सूबे की राजधानी लखनऊ में प्रदेश सरकार के विरोध में गुरुवार को आयोजित हुए धरने में शामिल होने जा रहे राज्य कर्मियों को पुलिस ने रोक दिया। इससे उनका गुस्सा भड़क उठा। सभी ने विकास भवन के बाहर सड़क पर पहुंचकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन शुरू किया।
सूचना पर सीओ सदर, कोतवाल पहुंचे। इस दौरान दोनों से राज्य कर्मियों की तीखी तकरार हुई। हालांकि पुलिस के आगे कर्मियों की एक नहीं चल सकी। बसों को रुकवा दिया गया। इससे अफरातफरी का माहौल रहा।
लखनऊ जाने के लिए सुबह विकास भवन में राज्य कर्मचारी एकत्र हुए। उनको ले जाने के लिए प्राइवेट बसें की गई थीं। धरने में कर्मचारियों के शामिल होने की सूचना पर कोतवाल शैलेंद्र त्रिपाठी फोर्स के साथ पहुंच गए।
उन्होंने कर्मियों को लखनऊ जाने से रोका। यही नहीं कुछ महिला कर्मियों को बस से नीचे उतार दिया। अन्य गाड़ियों को विकास भवन के अंदर घुसने नहीं दिया गया। इससे कर्मियों का गुस्सा भड़क उठा।
सभी विकास भवन के बाहर आ गए और रोड जाम कर दिया। इस दौरान पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। बवाल बढ़ने की सूचना पर सीओ सदर सत्यपाल सिंह पहुंचे।
उन्होंने कर्मियों को समझाने की कोशिश की तो उनसे भी नोकझोंक हुई। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद जिलाध्यक्ष प्रमोद अवस्थी, वीएस सक्सेना, रणवीर सिंह, हंसराज सिंह का कहना था कि हमारी आवाज दबाई जा रही है।
इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दो घंटे तक अफरातफरी का माहौल रहा।