रायबरेली। जिले में स्मार्ट मीटर लगाने के साथ नई केबल नहीं लगाई जा रही है। कार्यदायी एजेंसी पहले से घरों में लगी केबल पर ही मीटर लगा रही है। ऐसे में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने की कवायद पर सवाल उठ रहे हैं।
जिले में पांच लाख उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के यहां इलेक्ट्राॅनिक मीटर लगे हैं। इन मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर लगाया जाना है। छापे के दौरान अधिकांश जगह मीटर के पहले केबल कटी मिली है। इससे जहां हादसों का डर बना रहता है, वहीं बिजली चोरी भी आसानी से की जा सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए स्मार्ट मीटर के साथ सभी जगह नई केबल लगाई जानी है। अब तक जिले भर में करीब 40 हजार मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन अधिकांश जगह नई केबल नहीं लगाई गई है।
एक माह में पकड़े गए पांच हजार मामले
अगर मीटर के पहले केबल कटी है, तो वह बिजली चोरी के श्रेणी में आता है। मई महीने में अभियंताओं ने पांच हजार ऐसे मामले पकड़े, जहां पर मीटर के पहले केबल को काटकर बिजली चोरी हो रही थी। इससे साफ है कि बड़े पैमाने पर केबल काटकर चोरी होती है।
केबल की खाशियत
स्मार्ट मीटर के साथ जो केबल लगाई जानी है, उसकी गुणवत्ता अन्य केबलों से काफी बेहतर होती है। बाजार में इसकी कीमत 80 से 100 रुपये प्रति मीटर है। इस केबल में आसानी से कट नहीं लग सकता। अंदर लोहे की लेयर होती, उसके अंदर एल्युमिनियम के तार होते हैं। हवा के झोंके से यह टूटती नहीं है। इसके साथ अगल से सेफ्टी वायर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कार्यदायी एजेंसी से मांगा जाएगा जवाब
स्मार्ट मीटर के साथ सभी जगह नई केबल लगाई जानी है। यदि मीटर के साथ केबल नहीं लगाई जाती है, तो कार्यदायी एजेंसी से जवाब तलब किया जाएगा।
-फूलचंद्र भारती, अधिशासी अभियंता टेस्ट डिवीजन