फर्जी शासनादेश के सहारे विधायक निधि में करोड़ों के घोटाले में लोकायुक्त कार्यालय की जांच आने के बाद अब पटल सहायक को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि शासन स्तर पर एक साल पहले ही बाबू को निलंबित करने के आदेश दिए गए थे। जिले स्तर पर जांच पूरी होने के बाद गुरुवार को कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया।
वर्ष 2012-13 में फर्जी शासनादेश पर राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लिमिटेड को ऊंचाहार से सपा विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय की विधायक निधि से करीब 88 लाख रुपयों का काम दिया था।
इसके अलावा सरेनी विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह की निधि एक करोड़, बछरावां विधायक रामलाल अकेला की निधि से एक करोड़ 26 लाख रुपये और हरचंदपुर विधायक सुरेंद्र विक्रम सिंह की निधि से एक करोड़ 34 लाख रुपये के काम दिए थे।
शिकायत होने पर लोकायुक्त कार्यालय के मुख्य इंवेस्टीगेशन अफसर प्रसून कुमार कटियार व अशोक कुमार वर्मा की टीम ने जांच की थी। जांच पूरी होने के बाद लोकायुक्त कार्यालय ने शासन को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संस्तुति कर दी थी।
विधायक निधि घोटाले में फंसे तत्कालीन तकनीकी अन्वेषक अरुण कुमार शुक्ला को शासन स्तर पर वर्ष 2014 में ही निलंबित कर दिया गया था और दोषी पटल सहायक अशोक शुक्ला के खिलाफ जांच कर कार्रवाई का आदेश स्थानीय प्रशासन को दिया था।
मामले में फर्जी शासनादेश बनाने के मामले में जालसाजी का केस दर्ज कराया गया था। सीडीओ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि विधायक निधि घोटाले में पटल सहायक अशोक शुक्ला के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कहा गया था। जांच कराने के बाद गुरुवार को पटल सहायक को निलंबित कर दिया गया है।