फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से जंग में दिनरात खतरे से जूझ रहे डॉक्टरों को सलाम

विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। आज (1जुलाई को) डॉक्टर्स-डे है। ऐसे में कोरोना से जंग में घर परिवार से दूर दिन रात खतरों के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले डॉक्टरों के जज्बे को सभी का सलाम है। संदिग्ध लोगों के सैंपल लेने से लेकर जांच और इलाज में ये बेफिक्र होकर काम कर रहे हैं।
विज्ञापन

तमाम ऐसे महायोद्धा हैं जिन्हें कोई नहीं जानता, लेकिन इस महामारी के दौर में वे जो काम कर रहे हैं, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कोई कोविड अस्पताल तो कोई हॉट-स्पॉट और अन्य खतरों वाले स्थानों पर लोगों को कोरोना के खतरे से बचाने के लिए जोखिम उठा रहे हैं।
डॉक्टरों के अच्छे इलाज से जिले में कोरोना का कहर थमा और 80 प्रतिशत मरीज ठीक होकर घर भी पहुंच चुके हैं। सीएचसी शिवगढ़ में कार्यरत डॉ. प्रदीप गुप्ता वर्तमान में रॉयन स्कूल के कोविड अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
विज्ञापन

इससे पहले उन्होंने क्वारंटीन सेंटरों भर्ती लोगों का इलाज किया। चिकित्सक का कहना है कि जिले को कोरोना मुक्त रखने के लिए जो भी हो सकता है वह करने का प्रयास कर रहे हैं। मरीजों के बीच रहना अच्छा लगता है।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. ऋषी बागची कोरोना कोरोना से जंग में तीन महीने से अहम भूमिका निभा रहे हैं। संदिग्धों का सैंपल कलेक्ट करवाने के साथ ही उसे लखनऊ तक पहुंचाते की उनकी जिम्मेदारी है। यहां तक कि घर जाने का मौका तक नहीं मिल पाता है।
उनका कहना है कि आज के समय में हम सभी के लिए ड्यूटी बहुत जरूरी है। डीजी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षण) डॉ. बद्री विशाल के बेटे व बछरावां सीएचसी में संविदा पर आरबीएसके टीम में कार्यरत डॉ. मनीष प्रताप सिंह मिसाल बन गए हैं।
अधिकारी के बेटे होने के बाद भी वे रोजाना अस्पताल आते हैं और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लोगों का इलाज करते हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर का नाम ही सेवा होता है। हमे अपने कर्तव्यों का पालन जरूरी है।
पीएचसी अंबारा पश्चिम में कार्यरत डॉ. जीके चौरसिया लगातार क्वारंटीन सेंटर में काम कर रहे हैं। शुरू में सैंपल कलेक्शन सेंटर में काम किया। वर्तमान समय में वे गोपाल सरस्वती क्वारंटीन में ड्यूटी कर रहे हैं।
डॉ. चौरसिया का कहना है कि खतरा तो बहुत रहता है, लेकिन मरीजों की सेवा करने से आत्मा को संतुष्टि मिलती है। काम अच्छा लगता है। सीएचसी हरचंदपुर के कोविड अस्पताल में ड्यूटी करने के बाद डॉ. दिनेश यादव वर्तमान समय में गोपाल सरस्वती स्कूल के क्वारंटीन में ड्यूटी कर रहे हैं।
चिकित्सक का कहना है कि डॉक्टरों को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। कोरोना संकट काल में काम भले ही अधिक करना पड़ रहा है, लेकिन काम करने में अच्छा लग रहा है।
जिला अस्पताल के लैब टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. आरबी यादव पूरे लॉकडाउन में कोरोना के संदिग्ध लोगों के बीच रहे। रोजाना टीम के साथ पहुंचकर जांच के लिए सैंपलिंग कर रहे हैं। डर भी लगता है, लेकिन काम करने से वे पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना ने हम सभी को काम करना सिखा दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें