रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनाने के लिए कार्यरत 6549 रसोइयों का मानदेय नवंबर से बकाया था। उन्हें अब थोड़ी राहत मिली है। तीन महीने का बकाया मानदेय उनके खाते में भेजा गया है। हर रसोइये को 1500 प्रतिमाह की दर से 4500 रुपये खाते में भेजे गए हैं। मानदेय के तौर पर 2.44 करोड़ रुपये की धनराशि खातों में भेजी जा चुकी है।
जिले में मध्याह्न भोजन योजना से लगभग ढाई लाख बच्चे आच्छादित हैं। विद्यालय खुलने के बाद अब आने वाले बच्चों को निर्धारित मेन्यू के मुताबिक भोजन दिया जा रहा है। भोजन बनाने की जिम्मेदारी रसोइयों के ही जिम्मे है। नवंबर से मानदेय न मिलने से उनके सामने काफी परेशानियां थीं। जैसे ही मानदेय के लिए बजट मिला उसे जिले में कार्यरत 6549 रसोइयों के खातों में भेज दिया गया।
जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि प्रत्येक रसोइये के खाते में नवंबर, दिसंबर, जनवरी के मानदेय के रूप में 4500 रुपये भेजे गए हैं। इस तरह सभी रसोइयों को मानदेय के रूप में लगभग 2.44 करोड़ रुपये दिया गया है, जो रसोइयों के खातों में पहुंच गया है।
कन्वर्जन कास्ट के लिए भेजे 2.63 करोड़ रुपये
मध्याह्न भोजन योजना सुचारु रूप से संचालित हो सके, इसके लिए परिषदीय विद्यालयों को कन्वर्जन कास्ट भी भेज दी गई है। जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालय 10 फरवरी से खुले हैं तो प्राथमिक विद्यालयों में 1 मार्च से कक्षाएं शुरू हुई हैं। इस लिए 31 मार्च तक के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 37 दिवस और प्राथमिक विद्यालयों में 24 दिवस की कन्वर्जन कास्ट भेजी गई है। डीसी एमडीएम विनय कुमार तिवारी ने बताया कि प्राइमरी स्कूलों को 1.22 करोड़ और जूनियर हाईस्कूलों को 1.41 करोड़ रुपये परिवर्तन लागत के रूप में विद्यालयों के एमडीएम खातों में भेजे गए हैं।
रसोइयों को तीन महीने का मानदेय दे दिया गया है। कन्वर्जन कास्ट भी 31 मार्च तक के लिए विद्यालयों को उपलब्ध करा दी गई है। अब सभी की जिम्मेदारी है कि विद्यालयों में नियमित रूप से मध्याह्न भोजन बनाया जाए। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए।