सरेनी (रायबरेली)। जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर सरेनी ब्लॉक की पहुरी ग्राम पंचायत का तिवारीपुर मजरे में बदहाली लोगों का दम घोंट रही है। यहां का रास्ता इतना बदहाल है कि गांव पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। कचरे व कीचड़ से भरे मार्ग से चार पहिया वाहन नहीं निकल पाते हैं। ऐसे में गांव में यदि कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं मिल पाती है। इसी बदहाली ने एक सप्ताह के भीतर दो लोगों की जान ले ली है। गांव के बच्चों का भविष्य भी अधर में है। बारिश के समय खराब रास्ते के चलते वे स्कूल जाने से कतरा रहे हैं।
समय से उपचार न मिल पाने से चली गई जान
ग्राम प्रधान राघवेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की मीना तिवारी (53) को हार्ट की बीमारी थी। गत 26 जुलाई को उनकी हालत बिगड़ी तो घरवालों ने एम्बुलेंस को फोन लगाया, लेकिन रास्ता खराब होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची। समय पर उपचार न मिल पाने से उनकी मौत हो गई। इसी तरह 27 जुलाई को गांव के अवधेश को तेज बुखार होने पर घरवालों ने अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन नहीं आई। इससे उनकी भी मौत हो गई।
भारी पड़ी रही जिम्मेदारों की लापरवाही
ग्रामीण बसंत बाबू, अभय तिवारी, हितेश मिश्र, विमला मिश्र, शुभम व शिव मिश्र का कहना है कि करीब 150 लोगों की आबादी वाले इस मजरे तक पहुंचने का एक मात्र रास्ता वर्षों से बदहाल होने के बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। सड़क दुरुस्त करवाने के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बारे में खंड विकास अधिकारी प्रमोद कुमार यादव का कहना है कि मार्ग खराब होने की जानकारी मिली है। जल्द ही इसे सही करवाया जाएगा।