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Raebareli News: टीके न लगने से पशुओं में बीमारी का खतरा

Thu, 13 Aug 2026 01:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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रायबरेली क्षेत्र में मवेशी को टीका लगाते पशु चिकित्सा कर्मी।
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रायबरेली। खुरपका, मुंहपका जैसी बीमारियों से पशुओं को बचाने के लिए शुरू किया गया टीकाकरण अभियान रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। विभागीय चिकित्सकों का दावा है कि पशुओं को समय से टीके नहीं लगना बड़ा खतरा है। इससे पशु लंपी स्किन, खुरपका, मुंहपका, ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारी के चपेट में आते हैं। यह ऐसी बीमारियां हैं, जिसमें पशुओं की जान चली जाती है।
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कई मामलों में दुग्ध उत्पादन कम होने से इसका खामियाजा पशुपालकों को उठाना पड़ता है। मौजूदा समय में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) से पशुओं को बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। इस बार पांच लाख 65 हजार पशुओं को टीके लगाए जाने हैं। बुधवार तक करीब 90 हजार पशुओं को टीके लग चुके हैं। हकीकत ये है कि गांवों तक टीमें नहीं पहुंचने से पशुओं को टीके नहीं लग पा रहे हैं। ज्यादातर गांवों में पशुओं को टीके नहीं लगे हैं। ऐसे में पशुओं को इन बीमारियों के चपेट में आने की आशंका जताई जा रही है।

उधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप द्विवेदी ने बताया कि सभी पशु चिकित्साधिकारी को टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय पर जितने पशुओं में टीका लगाने का लक्ष्य मिला है, उसे पूरा किया जाएगा।
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तेजी से फैलता है वायरस, टीका लगना जरूरी
पूर्व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि समय रहते टीके लगने पर पशुओं को बीमारी से बचाया जा सकता है। ऐसा नहीं किया गया तो पशु खुरपका, मुंहपका बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। इसमें पशुओं के मुंह और पैर में छाले पड़ जाते हैं। पशु कमजोर हो जाता है। भोजन करना बंद कर देता है।

इसका असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है। इन बीमारियों के चपेट में आने से पशुओं का गर्भपात हो जाता है। पशुओं के मौत होने का खतरा रहता है। खास बात ये है कि यदि एक पशु में यह बीमारी हो गई तो अन्य पशु भी इसकी चपेट में आ जाएंगे, क्योंकि बीमारी के वायरस तेजी से फैलते हैं। खास बात ये है कि यदि किसी तरह पशु ठीक भी हो जाता है तो उसमें दुग्ध उत्पादन की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए पशुओं को समय पर टीका लगना जरूरी होता है। ब्रुसेलोसिस बीमारी होने से भी पशुओं में गर्भपात होता है।


बीमारी से किसी पशु की नहीं हुई मौत
पशुपालन विभाग के रिकाॅर्ड के मुताबिक साल 2024 में सात लाख 65 हजार 847, 2025 में सात लाख 90 हजार और 2026 में अब तक आठ लाख चार हजार 869 पशु बुखार, लंपी स्किन, खुरपका-मुंहपका और ब्रुसेलोसिस समेत अन्य बीमारी के चपेट में आकर बीमार हुए हैं। इसमें ज्यादातर पशुओं का कई बार इलाज किया गया है। विभाग का दावा है कि बीमार पशुओं में किसी की भी मौत नहीं हुई है। विभागीय टीमों ने पशुओं का इलाज किया। पशुओं की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल के चिकित्सक के अलावा पशुधन प्रसार अधिकारी पर रहती है।


प्रति पशु टीका लगाने पर मिलता है पांच रुपये
विभाग का दावा है कि टीकाकरण अभियान के दौरान प्रति पशु टीका लगाने पर सिर्फ एक पैरावेट को पांच रुपये मिलते हैं। अन्य किसी को टीका लगाने पर भुगतान नहीं होता है। इधर, तीन साल से पैरावेट का भुगतान नहीं किया गया है। इन्हीं मांगों को लेकर पैरावेट हड़ताल कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि टीकाकरण अभियान रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।

हलोर प्रतिनिधि के मुताबिक जमुरवां गांव के पशुपालक श्रवण यादव पशुओं को अब तक टीके नहीं लगे हैं। हिलहा ग्राम प्रधान रामप्रसाद तिवारी ने बताया अभी तक उनकी ग्राम सभा में टीकाकरण नहीं किया गया। महराजगंज प्रतिनिधि के मुताबिक गढी पोखरनी निवासी पशुपालक सहदेव शुक्ला का कहना है कि उनके पास छह पशु हैं। अभी तक पशुओं को टीका नहीं लगा है। प्रभारी पशु-चिकित्सक हलोर डॉ. उमेश चंद्रा का कहना है कि पैरावेट की हड़ताल के कारण क्षेत्र में टीकाकरण अभी नहीं हो सका।
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