17 साल पुराने वाहन से ढो रहे गरीबों का अन्न
कोटे की दुकानों तक राशन पहुंचाने के लिए 17 साल पुराने कंडम वाहन भी लगा दिए गये हैं। यूपी 33 ए 9586 के नाम से रजिस्टर्ड वाहन की फिटनेस दो साल से नहीं कराई गई है। परिवहन विभाग की साइड पर फिटनेस प्रदर्शित नहीं हो रही है। प्रदूषण भी वैध नहीं है। इसी तरह यूपी 47 टी 8181 का फिटनेस भी खत्म हो चुका है। कई वाहनों का बीमा तक नहीं है।
केस दो
80 ट्रकों में 38 के रजिस्ट्रेशन नंबर दूसरे जिलों के
सिंगल डोर स्टेप डिलिवरी सिस्टम में लगाए गए 80 ट्रकों में से 38 के पंजीयन दूसरे जिलों के हैं। वाहन संख्या एमपी 09 एचएफ 4659 का पंजीयन मध्य प्रदेश का है।
इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, प्रयागराज, आजमगढ़ सहित अन्य जिलों के रजिस्ट्रेशन नंबर वाले ट्रक भी गांवों तक राशन पहुंचाने के लिए लगा दिए गये हैं। कई वाहन पुराने होने के साथ बेहद जर्जर हालत में हैं।
रायबरेली। कोटे की दुकानों पर सीधे राशन पहुंचाने के लिए वाहन का चयन करते विभाग चूक गया है। शासन के मानकों को ताक पर रखकर सिंगल डोर स्टेप डिलिवरी के लिए अनफिट वाहनों को संभागीय खाद्य नियंत्रक ने हरी झंडी दे दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में राशन पहुंचाने के लिए 80 छोटे-बड़े भार वाहनों को जिम्मा दिया गया है, लेकिन करीब 50 वाहनों के फिटनेस एक्सपायर्ड हो गए हैं।
कई वाहनों के बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र भी नहीं हैं। कई वाहनों के मालिक बीमा कराना ही भूल गए हैं। बड़ी चूक सामने आने के बाद विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया है।
जिले में कोटे की 1145 दुकानों पर एफसीआई गोदाम से सीधे राशन पहुंचाने के लिए काम छह ठेकेदारों को दिया गया है। अब तक यह राशन ब्लॉक गोदामों से कोटेदारों को उठान करके गांवों में बांटना पड़ता है। ऐसे में आए दिन गरीबों के राशन की कालाबाजारी की खबरें सामने आ रही थीं।
सरकार ने राशन की चोरी को रोकने के लिए सीधे दुकानों पर राशन पहुंचाने की व्यवस्था की है। संभागीय खाद्य नियंत्रक के कार्यालय से ठेकेदार और राशन ढोने वाले वाहनों को पास किया गया।
मानक तो यह है कि एक-एक वाहन के कागजातों को चेक करने के बाद उन्हें काम में लगाया जाना चाहिए, लेकिन अधिकारियों ने मानकों को ताक पर रखकर अनफिट वाहनों को राशन पहुंचाने का जिम्मा सौंप दिया है। इससे गरीबों को राशन की सुरक्षा को बढ़ा खतरा खड़ा हो गया है। हालांकि पोल खुलने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
11,214 मीट्रिक टन राशन की सुरक्षा को खतरा
नियमानुसार, अनफिट वाहनों के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर बीमे क्लेम नहीं मिलता है। क्लेम के लिए वाहनों का पूरी तरह से फिट होना आवश्यक है।
अनफिट वाहनों से जिले में 11,214 मीट्रिक टन राशन गांवों में पहुंचाया जाएगा। वाहनों के अनफिट होने के कारण राशन की सुरक्षा को बड़ा खतरा है। यदि वाहन के साथ कोई अप्रिय घटना हो गई तो गरीबों के राशन का क्लेम विभाग नहीं पा सकेगा। इससे करोड़ों का नुकसान विभाग को उठाना पड़ेगा।
अनफिट वाहनों से राशन की अनलोडिंग गलत : एआरटीओ
संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) मनोज कुमार सिंह का कहना है कि अनफिट व्यावसायिक वाहनों का संचालन पूरी तरह से गलत है। यदि गरीबों के राशन को गांवों तक पहुंचाने में ऐसे वाहन लगाए गए हैं तो चेकिंग अभियान चलाकर अनफिट वाहनों को बंद किया जाएगा। फिट वाहनों का ही संचालन होने दिया जाएगा।
सिंगल डोल स्टेप डिलिवरी सिस्टम से कोटे की दुकानों पर राशन पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है। ठेकेदार और वाहनों का चयन संभागीय खाद्य नियंत्रक के यहां से किया गया है। वाहनों के फिटनेस के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
विमल कुमार शुक्ला, डीएसओ