किसी को घर मिला हिस्से में या दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई, इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है। लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती, बस मां है जो मुझसे खफा नहीं होती।
कुछ ऐसे ही मां की तमाम खूबियों पर जब प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना की कलम चली, तो न जाने कितनी आंखों में आंसुओं का दरिया उतर आया। न जाने कितने लोगों ने कलामों को सुनकर मां को गले लगा लिया। वहीं बुधवार को मुनव्वर राना की मां आयशा खातून का जनाजा उठा, तो मानों पूरा शहर ही उमड़ पड़ा हो।
लखनऊ और रायबरेली के साहित्यकार, बुद्धिजीवी, नेता, हर खासोआम उनकी मां को अंतिम विदाई के लिए पहुंचा। इस दौरान सबकी आंखें नम हो गईं। मंगलवार को लखनऊ में शायर की मां के इंतकाल की खबर लोगों को मिली तो उनके रायबरेली स्थित शेखवाड़ा, किला बाजार स्थित आवास में शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया।
उनसे जुड़ी हर शख्सियत घर पहुंचकर परिवारीजनों को ढांढस बंधाया। लखनऊ से आयशा खातून का जनाजा आवास पर लाया गया। यहां सामुदायिक केंद्र किला बाजार में मुनव्वर राना के अलावा उनके भाई राफेराना, इस्माईल, जमील, शकील समेत अन्य परिवारीजन और इष्ट मित्र पहुंचे।
यहां पर जनाजे की नमाज मौलाना बिलाल नकवी ने पढ़ाई। इसके बाद जनाजा किला बाजार, सैय्यद राजन होते हुए खपरमलंग कब्रिस्तान पहुंचा। जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से आयशा को अंतिम विदाई दी। मुनव्वर राना की मां गृहणी थी।
सांसद प्रतिनिधि केएल शर्मा, साहित्यकार वसीम बरेलवी, सरदार जोगिंदर सिंह, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अध्यक्ष राबे हसन नदवी, नगर विकास मंत्री आजम खां के निजी सचिव असफॉक, अंतर्राष्ट्रीय शायर अनवर जलालपुरी, नगर पालिका चेयरमैन इलियास, अतहर, ऐनुल हक, कमरुद्दीन, निर्मला शुक्ला, राजकुमार दीक्षित, ओपी यादव डॉ. इम्तियाज समेत बड़ी संख्या में लोगों ने मुनव्वर राना से मुलाकात कर गहरा दुख व्यक्त किया।
सूबे के नगर विकास मंत्री आजम खां बुधवार रात करीब नौ बजे साहित्यकार मुनव्वर राना के आवास शेखवाड़ा किला बाजार पहुंचे और उनकी मां के निधन पर शोक जताया। छोटे भाई राफेराना व अन्य परिवारीजनों से मिलकर दुख की इस घड़ी में हिम्मत से काम लेने की बात कही।