रायबरेली। जल जीवन मिशन योजना का काम सुस्त गति से चल रहा है। इससे जहां ग्रामीणों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। तय समय में काम पूरा होना मुश्किल दिख रहा है।
54 पुरानी परियोजनाओं के जीर्णोद्धार का काम अधर में लटका है। क्योंकि योजना के तहत काम कराने वाले एजेंसी एनसीसी ने डीपीआर ही तैयार करके जल निगम को नहीं दिया है।
इससे प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को नहीं भेजा जा सका है। इन परियोजना के ठीक न होने से करीब एक लाख लोगों को पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना से करीब 29 लाख आबादी को पानी उपलब्ध कराना है। इसके लिए जरूरत के हिसाब से ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियों का निर्माण होना है।
कुछ जगह पुरानी परियोजनाओं को जीर्णोद्धार कराकर घरों तक पानी पहुंचाया जाना है। जीर्णोद्धार के लिए 54 पुरानी परियोजनाओं को चिह्नित किया गया।
इन परियोजनाओं में किसी की मोटर खराब है, तो किसी की पाइप लाइन ध्वस्त है। कहीं पर छोटी-छोटी कमियां हैं। इन परियोजनाओं का जीर्णोद्धार कराकर हर घर तक शुद्ध पानी उपलब्ध कराना है।
कार्यदायी एजेंसी एनसीसी ने अब तक जीर्णोद्धार कराने वाली परियोजनाओं का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) ही तैयार नहीं किया है। इससे साफ जाहिर है कि लोगों को शुद्ध पानी के लिए अभी लंबे समय तक हैंडपंपों और कुओं का दूषित पानी पीना पड़ेगा।
छोटी-छोटी कमियों को ठीक कराने में जलनिगम लाचार
जिले में 101 पानी की टंकियां हैं। इसमें 65 जल निगम ग्रामीण के पास है, जबकि 36 पानी की टंकियां ग्राम पंचायतों के अंउर में हैं। 65 टंकियों में यदि कोई समस्या आती है तो उसे ठीक कराने के लिए जल निगम के अभियंता लंबा मंथन करना पड़ता है कि कैसे समस्या को दूर कराया जाए। क्योंकि 2017 से इस तरह की समस्याओं को ठीक कराने के लिए कोई बजट नहीं मिला है।
शुरुआती दौर में ही शुरू कर दिया गड़बड़झाला
जल जीवन मिशन योजना का काम कराने वाली एजेंसी ने शुरूआती दौर में ही गड़बड़झाला शुरू कर दिया है। टंकी भरने के लिए कई जगह कराए गए बोर कई फिट बालू डंप मिली थी। इसका खुलासा जल निगम विद्युत यांत्रिक के अभियंताओं की जांच में हुआ था। एजेंसी को हिदायत दी भी गई थी।
डीपीआर नहीं मिलने से हो रहा विलंब
जल निगम ग्रामीण के एक्सईएन मोहित विक्रम ने बताया कि जल जीवन मिशन योजना का काम करा रही एनसीसी के अधिकारियों से 54 पुरानी पेयजल परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए डीपीआर मांगा गया है। डीपीआर मिलने के बाद उसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। उच्चाधिकारियों से हरी झंडी मिलने के बाद जीर्णोद्धार का काम शुरू होगा। उधर, जल जीवन मिशन योजना का काम कराने वाली एनसीसी के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिल मंडला कुछ बताने से इंकार किया। कहा जो भी सूचनाएं हैं हम जल निगम को देंगे।