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गर्भवती को इतनी बेरहमी से पीटा, नवजात के आंतरिक अंग बाहर निकल आए

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खीरों (रायबरेली)। एक गर्भवती और उसका नवजात दहेज लोभियों की क्रूरता का शिकार हो गया। ससुरालीजनों ने पीटकर विवाहिता को घर से भगा दिया। शुक्रवार को विवाहिता ने सीएचसी खीरों में नवजात को जन्म दिया तो वह बुरी तरह जख्मी था। आंते तक बाहर निकल आई थीं। ऐसे में नवजात जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। पीड़ित महिला का आरोप है कि पति की पिटाई के कारण नवजात की यह हालत हुई है।
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हालत गंभीर होने पर जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल के बाद लखनऊ रेफर किया गया, लेकिन इलाज के लिए पैसे न होने के कारण परिवारीजन दोनों को लेकर घर पहुंच गए। मायका पक्ष ने पति और अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है।
खीरों थाना क्षेत्र के शिवपाल सिंह खेड़ा गांव की रहने वाली सरिता देवी (24) के मुताबिक आठ मई 2019 को उसकी शादी उन्नाव जिले के बीघापुर थाना क्षेत्र के मोहकमगंज निवासी जसवंतराय पुत्र केशन कुमार के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही उसका पति यशवंत समेत अन्य ससुरालीजन दहेज की मांग पर उसे प्रताड़ित करते थे। इस दौरान उसका पति उसे लेकर अमृतसर चला गया। वहां भी उसे मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया और कहीं भाग गया।
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सरिता का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले से अपने पिता सालिकराम को अवगत कराया। इस पर पिता अमृतसर पहुंचकर मुझे अपने घर ले आए। लगभग तीन माह बाद ससुरालीजनों से आपसी समझौता हो जाने के बाद पिता ने मुझे फिर ससुराल भेज दिया, लेकिन वहां पर मुझे फिर लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा।
आरोप है कि करीब 20 दिन पहले पति समेत अन्य ससुरालीजनों ने पीटकर घायल कर दिया, फिर वह पिता के साथ मायके चली आई। शुक्रवार की शाम सरिता ने सीएचसी में एक नवजात को जन्म दिया। आरोप है कि ससुरालीजनों की पिटाई की वजह से नवजात का पेट फटा है। डाक्टरों ने शिशु की नाजुक हालत देखते ही जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। पिता सालिकराम ने थाने में लिखित तहरीर देकर र्कारवाई की मांग की है।
खीरों के प्रभारी निरीक्षक राजेश सिंह ने बताया कि महिला ने पति व अन्य ससुरालीजनों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। तहरीर भी दी है। वह अपने स्तर से मामले की तहकीकात करा रहे हैं। मामला उन्नाव जिले का है। इसलिए परिवारीजन केस दर्ज कराने के लिए उन्नाव गए हुए हैं।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे नवजात की सर्जरी कराई जा सके। ऐसे में इलाज कराना मुश्किल है। परिवारीजन एक बार जिला अस्पताल में बच्चे को दिखा लें। जो भी संभव होगा, मदद के नाम पर इलाज किया जाएगा।
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