लेकिन सात घंटे तक आपूर्ति ठप रही। इससे शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक बिजली के लिए हाहाकार मचा रहा। कोई नलकूप चलाने के लिए तो कोई आटा पिसाई और सरसों पेराई के लिए कारखाना चलने का इंतजार करता रहा।
सरकारी दफ्तरों में बिजली न होने से कंप्यूटर नहीं चल सके, जिससे कामकाज बाधित रहा। वहीं औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों का चक्का जाम रहने से उद्यमियों को करीब 10 करोड़ का नुकसान हुआ है।
पावर कॉर्पोरेशन ने मंगलवार को सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक पूरे जिले की आपूर्ति बंद रखने की घोषणा की थी। इसकी वजह अमावां ट्रांसमिशन और पावर ग्रिड में मेंटीनेंस का कार्य होना बताया गया था।
अफसरों की लापरवाही का आलम यह रहा कि दोपहर एक बजे की जगह अपराह्न तीन बजे आपूर्ति बहाल हुई। इस दौरान पूरे जिले की 34 लाख से अधिक आबादी को बिजली संकट का सामना करना पड़ा।
शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक लोग परेशान रहे। कलेक्ट्रेट, विकास भवन, बीएसए दफ्तर, डीआईओएस दफ्तर समेत अन्य कार्यालयों में बिजली संकट के कारण कामकाज ठप रहा। नलकूप व आटा चक्की भी बंद रही।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ कंसल का कहना है कि सात घंटे बिजली न मिलने से 52 फैक्ट्रियों का चक्का जाम रहा। कई फैक्ट्रियों के तो ताले ही नहीं खुले। उन्होंने बताया कि उद्यमियों को करीब 10 करोड़ का नुकसान हुआ है।
एसडीओ ट्रांसमिशन एके मौर्या ने बताया कि अमावां ट्रांसमिशन और पावर ग्रिड में मेंटीनेंस के लिए पांच घंटे का शट डाउन लिया गया था। काम पूरा होने में समय ज्यादा लग गया।
इस वजह से सप्लाई देर से बहाल हुई। सोमवार को हुई कटौती को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आपूर्ति नहीं होगी।