रायबरेली। ग्रामीण अंचलों को 18 और तहसील मुख्यालयों को 22 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है, लेकिन जिले में इसका कोई अनुपालन नहीं हो रहा है।
ग्रामीण अंचलों की तरह ही तहसील मुख्यालयों को बिजली दी जा रही है। दिन और रात में कई घंटे की अघोषित कटौती हो रही है। इससे किसानों, मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। रात में होनी वाली अघोषित कटौती से लोग अंधेरे में रात काटने को विवश है।
किसानों की खेती प्रभावित हो रही है, तो व्यापारियों को कारोबार प्रभावित हो रहा है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधार के बजाय अभियंता केवल राजस्व वसूली तक सीमित है।
मौजूदा समय में बिजली की मांग करीब 300 मेगावाट यूनिट है, जबकि करीब 250 मेगावाट यूनिट बिजली मिल रही है। अफसर वसूली में मस्त हैं और जनता बिजली संकट से त्रस्त है।
जिले में 54 विद्युत उपकेंद्र हैं। इनसे निकले फीडरों के तार जर्जर होने के साथ ढीले हो गए हैं, जो गर्मियों में आए दिन टपकते रहते हैं। कहीं पर तार पेड़ की डालों के बीच से निकले हैं, तो कहीं बिजली का पोल टेढ़ा है।
यहीं वजह है कि आपूर्ति के समय दिनभर बिजली की आवाजाही लगी रहती है। शाम होते ही बिजली की अघोषित कटौती हो जाती है। यह सिलसिला रात में कई बार होता है। यही वजह है कि हाहाकार मचा है।
शाम होते ही गांवों में अंधेरे में डूब जाते हैं। इससे जहां छात्र परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं, वहीं महिलाओं को घर के काम निपटाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मच्छर से बचाव के लिए दवा तो कोई लगा रहा मच्छरदानी
रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्रों में शाम होते ही बिजली गुल हो जाती है। केरोसिन देने तो कई साल पहले से बंद कर दिया गया। इस वजह से कोई टार्च तो कोई चार्जिंग की लाइट का सहारा ले रहा है। बिजली न होने से छात्र परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं किसान खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र के किशोरी बालमपुर गांव के बबलू चौधरी, कीरतपुर चरुहार निवासी उमेश मौर्य ने बताया कि इस समय बिजली की आवाजाही से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक बीघा खेत की सिंचाई के लिए दिन भर ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। क्योंकि हर घंटे बिजली की कटौती हो जाती है। सरेनी ब्लॉक क्षेत्र के शीतल खेड़ा के श्यामू सिंह, रानीखेड़ा के दीप कुमार ने बताया कि 18 घंटे की जगह आठ से 10 घंटे बिजली मिल रही है। कई घंटे अघोषित कटौती हो जाती है।
राज्यमंत्री भी कटौती से नहीं दिला पा रहे निजात
ग्रामीण अंचलों में हो रही अघोषित कटौती पर अंकुश नहीं लग रहा है। सरेनी विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी पत्राचार किया और सरेनी विधानसभा क्षेत्र में हो रही अघोषित बिजली कटौती को बंद करने की मांग की।
विधायक ने डीएम के अलावा ऊर्जा मंत्री को पत्र भेजा है। इसके बावजूद कोई राहत नहीं मिली। इससे पहले राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह ने भी अघोषित कटौती बंद करने को लेकर पत्राचार किया। फिर भी राहत नहीं मिल सकी।
ग्रामीण अंचलों में अघोषित कटौती पावर ग्रिड से होती है। रात में जो कटौती होती है, उसे दिन में पूरा करने का प्रयास होता है। लाइनों में फॉल्ट आने पर उसे तत्काल दूर करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए अवर अभियंताओं को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। रात में भी फॉल्ट दूर कराकर आपूर्ति शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
-घनश्याम, प्रभारी, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन