रायबरेली। शुरू से वीआईपी रहे जिले में 15 फीसदी से अधिक आबादी हम दो-हमारे दो नारे को आत्मसात कर चुकी है। यहां 25 साल में 11 लाख आबादी बढ़ी है। आबादी बढ़ने के साथ ही रोजगार को भी पंख लगे और रोजगार के अवसर पांच गुना से अधिक बढ़े हैं। बढ़े संसाधनों ने जहां युवाओं को रोजगार दिया, वहीं शिक्षा के स्तर में भी सुधार हुआ। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) से जैसे संस्थान जिले की शान हैं। वहीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक तरक्की की इबारत लिख रही हैं।
1980 से 1990 के बीच जिले में करीब आठ लाख आबादी बढ़ी थी। 1991 में जिले की जनसंख्या 23.10 लाख थी। अब यह बढ़कर 34 लाख के आसपास पहुंच गई है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक 2011 में जिले में साक्षरता दर 67.2 प्रतिशत थी। जागरूकता कार्यक्रमों व शिक्षा के स्तर में सुधार के बूते लोग हम दो-हमारे दो पर अमल करने लगे। इसी के साथ गुजरते सालों में जिले को कई सौगात मिलीं। इसमें रेल कोच फैक्टरी, एम्स, एफजीआईईटी, एनटीपीसी जैसे बड़े प्रतिष्ठानों से लोगों को रोजगार मिल रहा है।
पांच हजार से अधिक छोटे-बड़े अन्य उद्योगों के माध्यम से भी 35 हजार से अधिक लोगों की जीविका चल रही है। स्कूलों, अस्पतालों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ। खासकर मॉल और शॉपिंग कांप्लेक्सों ने युवाओं को बड़े शहरों को जाने से रोका। मनरेगा, एनआरएलएम, पशुपालन, जिला उद्योग में लोगों को रोजगार के बड़े अवसर मिले हैं। 25 हजार से अधिक लोग स्वयं का वाहन संचालित करके आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। खेतों में उत्पादन बढ़ा है तो वैज्ञानिक खेती ने भी किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया है। संचार क्रांति ने युवाओं को रोजगार थमाया है। जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से 10 हजार से अधिक युवा अपना परिवार चला रहे हैं।
जिले में बढ़े संसाधन
संसाधन संख्या
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल 2299
निजी परिषदीय स्कूल 850
आंगनबाड़ी केंद्र 2700
सरकारी अस्पताल 74
निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी 500
मॉल, कांप्लेक्स 400
छोटे-बड़े उद्योग 5000
कहां कितने लोगों को मिला रोजगार
विभाग/पद संख्या
प्राथमिक शिक्षक 7000
शिक्षामित्र 2000
रसोइया 6600
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका 6500
मनरेगा में पंजीकृत श्रमिक 3,20,000
स्वयं सहायता समूह 10,000
पंजीकृत श्रमिक 30,000
उद्योग में मिला रोजगार 35,000
आशाबहू 1600
अनुदेशक 600
पंचायत सहायक 800
पंचायत मित्र 700
सफाईकर्मी 1400
अब तक 30 हजार की नसबंदी, बढ़ी जागरूकता
हम दो हमारे दो को लेकर जिले के लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अब तक जिले में 30 हजार से अधिक लोगों ने नसबंदी कराई है। परिवार नियोजन के संसाधनों का प्रयोग करने के लिए भी लोग आगे आए हैं। अंतरा इंजेक्शन, कॉपर टी, छाया गोली सहित अन्य संसाधनों का प्रयोग 10 हजार से अधिक लोग कर रहे हैं। जिले की 15 प्रतिशत से अधिक आबादी हम दो हमारे दो के नारे को अपना रही है। अन्य लोग भी इसके लिए आगे आ रहे हैं।