वर्ष 1990 के दशक में भाई राकेश पांडेय की हत्या के बाद मनोज पांडेय राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए मैदान में आ गए। वर्ष 2000 में भाजपा के टिकट पर नगर पालिका रायबरेली के अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और जीते। हालांकि वर्ष 2004 में वे सपा में शामिल हो गए, उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया गया था।
तो जिले में भाजपा को मिलेगी सियासी मजबूती
विधायक डॉ. मनोज पांडेय की वजह से जिले में भाजपा को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है। सियासी रणनीतिकार इस पर आंकलन करने में जुट गए हैं। वहीं ऊंचाहार के साथ ही सरेनी, हरचंदपुर, बछरावां और सदर विधानसभा में भी राजनीति के नए आयाम तय होने वाले हैं। कहीं न कहीं इसका खामियाजा सपा के साथ ही कांग्रेस को उठाना पड़ेगा।