रायबरेली। ...यूक्रेन में हर तरफ सिर्फ बम, गोली व बारूद का जोर है। तेज धमाकों के बीच लोग जान बचाने की जद्दोजहद में भाग रहे हैं। कुछ अभी भी जल्द युद्ध समाप्त हो जाने की आस में बंकर में छिपे हैं।
यहां भारत के अलावा कई देशों के छात्र मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। हालात बिगड़े तो कई भारतीय छात्र हाथों में तिरंगा लेकर किसी तरह वहां से बच निकले।
इतना ही नहीं पाकिस्तान व बांग्लादेश के कई छात्र जान बचाने के लिए बदन पर तिरंगा लपेट कीव से भाग रहे हैं। खुद को भारतीय बताने पर उन्हें यूक्रेन व रूस की फौजें कुछ नहीं कर रही हैं।
यूक्रेन से सकुशल लौटे सलोन निवासी अंशदीप व शहर के आचार्य द्विवेदी नगर निवासी मेडिकल के छात्र सूरज पटेल ने वहां के छात्रों की आपबीती बयां तो सुनने वालों की भी आंखें भर आईं।
मेडिकल के छात्र सूरज ने बताया कि युद्ध शुरू होने की आशंका के बीच 23 फरवरी को ही दुबई के लिए फ्लाइट का टिकट बुक करा लिया था और यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंच गया था।
24 फरवरी को फ्लाइट पकड़नी थी, लेकिन इससे पहले ही रूस की तरफ से यूक्रेन के बोरेसिपल एयरबेस पर धमाका होने लगा। धमाके इतने तेज थे कि उम्मीद टूट चुकी थी कि जिंदगी सलामत रहेगी या नहीं।
किसी तरह साहस जुटाया और रात में कीव के एक होटल में ठहरा। पूरी रात जागकर गुजारी। दूसरे दिन 25 फरवरी की सुबह होटल संचालक के कहने पर कीव रेलवे स्टेशन की तरफ जा रहा था, लेकिन वहां पर लंबा जाम लग गया था। रेलवे स्टेशन नहीं पहुंच पाया था। इस पर पैदल ही टर्नोपिल शहर की तरफ निकल पड़ा।
कीव के बार्डर पर जोतोमेयर सिटी रोड की तरफ जा रहा था। यहां घना वन क्षेत्र पड़ता था। इस दौरान रूस के फाइटर जेट आसमान में फर्राटा भर रहे थे।
यहीं पर एक होटल में रुका और फिर सुबह कीव स्थित भारतीय दूतावास पहुंचा। लेकिन काफी देर होने से काफी नहीं बना। फिर कीव रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जरिए टर्नोपिल शहर पहुंचा। यहां पर टैक्सी करके रोमानिया बॉर्डर पहुंचा। रोमानिया बॉर्डर पर 24 घंटे खड़े रहना पड़ा।
तब जाकर बार्डर पार कर सका। सूूरज ने बताया कि वह टर्नोपिल शहर स्थित टर्नोपिल मेडिकल यूूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वहीं बेटे के सकुशल पहुंचने पर मां मंजू देवी और पिता विनोद कुमार वर्मा ने खुशी जताई।
भारतीय तिरंगा भारतीय नहीं, पाकिस्तान आदि देशों के छात्रों की बचा रहा जान
सलोन। यूक्रेन से लौटकर आए मेडिकल छात्र अंशदीप ने बताया कि यूूक्रेन में युद्ध के हालात के दौरान भारतीय ध्वज किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। ऐसे में चाहे पाकिस्तानी के छात्र हों या फिर कोई और देश, वह तिरंगे की छांव में अपने मुल्क लौटने की कोशिश में लगा है।
भारतीय तिरंगा देखकर छात्र-छात्राओं पर हमला नहीं किया जाता। सलोन नगर निवासी व्यापारी गुरुचरन सिंह उर्फ राजू सरदार का पुत्र अंशदीप सिंह को भारत सरकार ने सचिवालय की गाड़ी उसके घर छोड़ा।
अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिवारीजन खुशी से झूम रहे हैं। अंशदीप ने बताया कि इस समय यूक्रेन के हालत बहुत खराब हैं, लेकिन सबसे अच्छी बात है कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ अन्य मुल्क के मेडिकल छात्र भारतीय ध्वज लेकर यूक्रेन से अलग-अलग देशों के बार्डर पहुंचकर अपने आप को इंडियन बता रहे हैं। अंशदीप यूक्रेन के लवीव नेशनल मेडिकल यूनिवसिर्टी में मेडिकल की पढ़ाई करने गया था।
यूक्रेन और रूस में युद्ध शुरू हुआ तो अंशदीप लवीव से बस लेकर ऊंहा गोरोड पहुंचा और एक दिन रुककर हंगरी बॉर्डर पहुंचा। यहां से एयर इंडिया के विमान से अंशदीप मुंबई पहुंचा और फिर यूपी सरकार की सहायता से लखनऊ पहुंचा।
योगी सरकार के कर्मचारियों ने खाना खिलाने के बाद सचिवालय की गाड़ी से उसे शुक्रवार रात 12:50 मिनट पर घर छोड़ा।
अंशदीप ने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से वह आज सही सलामत अपने माता-पिता के पास मौजूद है। उन्हीं की वजह से हंगरी से लेकर घर तक निशुल्क घर पहुंचाया गया। अंशदीप की मां दलजीत कौर और पिता गुरुचरन सिंह ने मोदी सरकार को धन्यवाद दिया। दलजीत ने कहा कि टीवी पर युद्ध की भयावह तस्वीर देखकर बेटे के लिए मन व्याकुल हो उठता था।