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ऑक्सीजन के साथ दवा मिल पाना साबित हो रहा टेढ़ी खीर

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मेडिकल स्टोर पर दवा लेने के लिए खड़े लोग। - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। कोरोना की मार झेल रहे लोगों को ऑक्सीजन छोड़िए दवा पाने के लिए माथापच्ची करनी पड़ रही है। जरूरी दवाओं की मेडिकल स्टोरों में कमी हो गई है। हालात इसी तरह रहे तो दवाएं मिलना मुश्किल हो जाएगा।
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महंगी दवा बेचकर मरीजों की जेब पर डाका डालने का काम किया जा रहा है। सबसे ज्यादा एजेंसी संचालक कालाबाजारी करके दवाओं की बिक्री करने का काम कर रहे हैं। इन एजेंसी संचालकों के खिलाफ जिले में विभागीय अधिकारी एक्शन नहीं ले रहे हैं।
आक्सीजन लेबल नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर मेडिकल स्टोरों पर नहीं मिल पा रहा है। यदि किसी मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध है तो 400 रुपये में मिलने वाला पल्स ऑक्सीमीटर 1200 रुपये में मरीजों को थमाया जा रहा है। यही नहीं भाप लेने वाली मशीन भी मेडिकल स्टोरों से नदारद है।
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बुखार में प्रयोग लाई जाने वाली पैरासीटामाल, डोलो, एंटीबायोटिक डॉक्सी कैप्सूल और विटामिन सी की कमी पूरा करने के लिए खाई जाने वाली लिमसी की मेडिकल स्टोरों पर उपलब्धता कम हो गई है।
कोरोना से संक्रमित या फिर बुखार आदि आने पर चिकित्सकों की ओर से इन दवाओं को लिखकर खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन मरीजों को दवा पाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। कहा जा रहा है कि दवाओं की कमी के पीछे दवा एजेंसी संचालकों का हाथ है। एजेंसी संचालक दवाओं की कालाबाजारी कर रहे हैं। अपने चहेते मेडिकल स्टोरों को महंगे दाम में दवाओं की पूर्ति कर रहे हैं।
दफ्तर से हो रही मेडिकल स्टोरों पर निगरानी
जिले में तैनात औषधि निरीक्षक की लापरवाही से दवा खरीदने में मरीजों को जेब हल्की करनी पड़ रही है। दवा की कालाबाजारी होने के बाद भी औषधि निरीक्षक दफ्तर से ही मेडिकल स्टोरों और दवा एजेंसियों की निगरानी करते हैं। खास बात ये है कि उनके दफ्तर में ही कुछ चहेते एजेंसी संचालक जमे रहते हैं। इन्हीं एजेंसी संचालकों के सहारे दवाओं की कालाबाजारी का काम होता है। बावजूद डीआई के खास होने के चलते इन एजेंसी संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
क्या कहते हैं मरीज
जगतपुर के रहने वाले अनुराग गुप्ता को बुखार था। जिला अस्पताल स्थित एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें 15 दिन के बजाय एक सप्ताह की दवा दी गई। कहा गया है कि दवा की कमी चल रही है। इतने ही काम चलाओ।
अनुराग कहते हैं कि ऑक्सीजन लेबल नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर की जरूरत थी, लेकिन नहीं मिल पाया। भाप लेने की मशीन तक नहीं मिली। जिला अस्पताल स्थित मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे मरीज आरती देवी और शिवसागर यादव का कहना था कि आक्सीजन के साथ दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
सभी मेडिकल स्टोर और एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह दवाओं की कालाबाजारी न करें। तय रेट पर ही दवा की बिक्री करें। यदि कोई मनमाने ढंग से दवा की बिक्री कर रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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अजय कुमार संतोषी, औषधि निरीक्षक
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