रायबरेली। मासूमों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए लगने वाले टीके भी कोरोना के भेंट चढ़ गए हैं। जिले में करीब सवा लाख बच्चे समय से टीकाकरण से वंचित हो गए हैं। कई महीने तक लॉकडाउन के कारण टीकाकरण का काम काफी प्रभावित हो गया।
अनलॉक शुरू होने के बाद टीकाकरण में प्रगति तो आई लेकिन जापानी इंसेफ्लाइटिस के टीके के लक्ष्य को छोड़ शेष सभी टीकों की प्रगति पिछले साल की तुलना में काफी कम है। हालांकि अब विभाग किसी न किसी तरह लक्ष्य को पूरा करने के प्रयास में है।
अगले महीने से शुरू होने वाले दस्तक अभियान में लक्ष्य को पूरा करने की मंशा है। प्रसव के बाद से ही मासूमों में टीकाकरण का काम शुरू हो जाता है। पांच साल की उम्र तक रूटीन टीके समय से लगाए जाते हैं। जापानी इंसेफ्लाइटिस के टीके अलग से भी अभियान चलाकर लगाए जाते हैं।
अप्रैल महीने से टीकाकरण का लक्ष्य तय किया गया, लेकिन कोरोना के मरीज बढ़ने और लॉकडाउन शुरू होने के कारण अप्रैल से अगस्त महीने में टीकाकरण पूरी तरह से प्रभावित रहा। अनलॉक के बाद टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास शुरू किया गया।
हर महीने सात-सात हजार से अधिक बच्चों को अलग-अलग टीके लगाने का लक्ष्य है, लेकिन किसी भी महीने यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। अक्तूबर माह में शुरू होने वाले दस्तक अभियान में लक्ष्य को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
जिले में दो साल में टीकाकरण की प्रगति
टीका वर्ष 2019 में प्रगति वर्ष 2020 में प्रगति
डीपीटी/पेंटावेलेंट 24.62 प्रतिशत 18.08 प्रतिशत
पोलियो 24.62 प्रतिशत 18.08 प्रतिशत
बीसीजी 22.29 प्रतिशत 20.31 प्रतिशत
मिजिल्स/रुबेला 23.43 प्रतिशत 22.93 प्रतिशत
हेपेटाइटिस बी 26.86 प्रतिशत 23.59 प्रतिशत
मिजिल्स-2 23.38 प्रतिशत 21.01 प्रतिशत
जेई-1 24.04 प्रतिशत 23.12 प्रतिशत
टीटी माताएं 22.85 प्रतिशत 19.93 प्रतिशत
लॉकडाउन के कारण टीकाकरण प्रभावित हुआ था। हालांकि लक्ष्य काफी हद तक पूरा कर लिया गया है। एक अक्तूबर माह में दस्तक अभियान चलेगा। शत प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। नगरीय क्षेत्र में अलग से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। -डॉ. वीरेंद्र सिंह सीएमओ