फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफसर बेखबर, एक माह में 25 लोगों की थम गई सांसें

विज्ञापन
विज्ञापन
महराजगंज (रायबरेली)। मऊगर्वी ग्राम पंचायत और उसके पुरवे बरीबरा गांव की गलियों में अजब सन्नाटा पसरा है। लोगों में भय और दहशत दिख रही है। कोई बुखार तो कोई सांस की समस्या से परेशान है, लेकिन न तो उनका इलाज हो पा रहा है और न ही जांच। जिनके कंधों पर गांव के लोगों की सेहत का ख्याल रखने की जिम्मेदारी है, उन्होंने मुंह मोड़ लिया है। ऐसे में जिंदगी बचाने के लिए लोग प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। न सिर्फ लोगों से मनमाना वसूला जा रहा है, बल्कि उनकी जिंदगी की भी कोई गारंटी नहीं हैं। हाल ये है कि एक माह में 25 लोगों की सांसें थम चुकी हैं। इसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत का गम लोगों को रुला रहा है। पहले दो भाइयों और फिर उनके पिता इस दुनिया से दूर चला गया।
विज्ञापन

महराजगंज तहसील क्षेत्र की मऊगर्वी ग्राम पंचायत और उसके पुरवे बरीबरा गांव में बीती 12 अप्रैल से असामाजिक मौतों का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात ये हैं कि मौतें होती रहीं, लेकिन प्रशासन खामोशी से बैठा रहा। गांव में ना तो टीकाकरण की व्यवस्था कराई गई और ना ही गांव को कंटेंनमेंट जोन घोषित किया गया। न ही व्यापक रूप से लोगों का कोरोना टेस्ट कराया गया। ग्रामीणों की चिंता और परेशानी देखते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रभात साहू ने नगर पंचायत महराजगंज की ओर से मशीनें और टैंकर भेज कर एक बार गांव का सैनिटाइजेशन जरूर करवाया, लेकिन यह नाकाफी रहा। मऊ बाजार के रहने वाले अमीन की 40 वर्षीय पत्नी की मौत हो गई। अमीन कहते हैं कि पत्नी को खांसी, बुखार, जुखाम की समस्या थी। फिर सांस लेने में काफी दिक्कत होने के बाद वह गांव में उपचार कराते रहे, लेकिन उनकी मौत हो गई। इसके अलावा बगल के ही रहने वाले वारिस अली बिल्कुल स्वस्थ दिख रहे थे। अचानक उन्हें सीने में दर्द हुआ। फिर सांस लेने में दिक्कत पैदा हो गई। जब तक घरवाले उन्हें इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था करते, उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
बरीबरा के रहने वाले मथुरा पासी का बड़ा लड़का रामनरेश (45) दिल्ली में काम करता था। वहां से उसने घरवालों को फोन किया कि वह कोरोना पॉजिटिव निकला है। वह दिल्ली से वापस घर आ रहा था। घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। उसकी चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि उसका छोटा भाई राम सजीवन (40) अपनी ससुराल गया था। उसकी हालत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हुई। रिश्तेदार जब तक अस्पताल ले जाते उसकी भी मौत हो गई। उसके पिता मथुरा प्रसाद पासी अपने दो लड़कों की अर्थी को कंधा दे चुके थे। उन्हें भी कोरोना जैसे लक्षण प्रतीत हुए और उनकी मौत हो गई। 10 दिन के अंदर एक ही परिवार के तीन लोगों का इस तरह जाना सबको रुला दिया।
विज्ञापन

कोई सुनने और देखने वाला नहीं
समाजसेवी अभय प्रताप सिंह उर्फ दिलीप कहते हैं कि स्वास्थ्य सुविधाओं का मऊ में अभाव है। छोटी-छोटी बीमारियों के लिए सीएचसी आना पड़ता है। गांव में हफ्ते में कम से कम दो दिन स्वास्थ्य परीक्षण का कैंप लगवाया जाना चाहिए। राजेश कुमार शर्मा कहते हैं कि जब से होश संभाला है, ऐसी भयावह स्थिति कभी नहीं देखी। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते यह स्थिति आई है। जिला प्रशासन और सरकार को मऊ में हुई मौतों की जांच कराकर लापरवाह अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। पूरे अहलादी मजरे मऊ के रहने वाले लक्ष्मीकांत अवस्थी कहते हैं कि गांव में इतनी मौतें हो गई। न शासन ना प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी यह पता लगाने आया कि मऊ में हो क्या रहा है। उनका कहना है कि गांव सभा में लोग भगवान भरोसे हैं। हर व्यक्ति शंका में जी रहा है कि आगे क्या होगा।
टीम भेजकर कराई जा रही जांच
महराजगंज तहसील क्षेत्र के सभी गांवों में लोगों के स्वास्थ्य का सर्वे कराया जा रहा है। कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोगों का ब्योरा लेकर कोरोना प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्था कराई जाती है। जहां आवश्यकता होती है वहां टीम भेजकर जांच कराई जाती है। मऊगर्वी गांव के जितने लोग अस्पताल आए, उनका इलाज करके दवाएं दी गई। सीएचसी में तैनात कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ खुद संक्रमित हो गया था। सीमित स्टाफ के बावजूद रोगियों की सेवा करने में हम पीछे नहीं हैं।
विज्ञापन

-डॉ. राधाकृष्णन, अधीक्षक, महराजगंज सीएचसी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें