रायबरेली। जिले में हर घर को शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना घोटाले का शिकार हो गई है। जितने भी बोर अब तक कराए गए हैं, उसमें कई बालू से डंप हैं।
ऐसे में यदि बोरिंग शुरू भी कर दी जाएगी तो लोगों को गंदा पानी पीना पड़ेगा। मामला उजागर होने के बाद जलनिगम के अधिकारियों ने कार्यदायी संस्था को ठीक तरीके से काम करने की नसीहत दी है। साथ ही अवर अभियंता व सहायक अभियंताओं की देखरेख में ही बोर कराने का फरमान जारी कर दिया।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत जिले की 29 लाख आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। जरूरत के हिसाब गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण होना है।
कार्यदायी संस्था एनसीसी काम करा रही है। अभी बोरिंग समेत अन्य कार्य हो रहे हैं। कहीं पर 300 मीटर तो कहीं पर 100 मीटर से अधिक बोर हो चुके हैं। इनमें से कई बोर ऐसे हैं, जो बालू से पटे हैं। यदि बालू की सफाई न कराई गई तो लोगों के घरों तक कैसे शुद्ध पानी पहुंचेगा।
जल निगम विद्युत यांत्रिक के अधिशासी अभियंता विशाल आर्य ने कार्यदायी एजेंसी के प्रबंधक एवं जिले के प्रोजेक्ट मैनेजर को पत्र लिखकर आदेश दिए हैं कि बालू की सफाई करने के बाद ही आगे का काम शुरू कराया जाएगा।
पत्र में यह भी कहा कि है कि इसके पहले भी कार्यदायी एजेंसी को बालू की सफाई करने के लिए चेतावनी दी गई, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
आदेश हैं कि अब जो बोरिंग का काम कराया जाए, वह अवर अभियंता व सहायक अभियंता की देखरेख में होगा। एनसीसी के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिल मंडला से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद था।
किसी परियोजना में कितनी बालू डंप
विकास खंड ग्राम सभा बोरिंग की गहराई कितने मीटर बालू
शिवगढ़ पिपरी 96.71 8.20
शिवगढ़ रामपुर खास 84.70 6.20
हरचंदपुर अघौरा 343 12.00
राही राघनपुर 108 6.70
राही चकरार 328 7.50
पहले चरण में बनेंगी पानी की 401 टंकियां
केंद्र सरकार की इस योजना में पहले चरण में जिले में 401 पानी की टंकियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। मौजूूदा समय में 39 पानी की टंकियों का निर्माण शुरू कराया गया है। इन पानी की टंकियों का निर्माण कराए जाने से पहले बोर कराने का कार्य कराया जा रहा है। शुरुआती दौर में ही कार्यदायी संस्था की अंधेरगर्दी ने इस योजना पर अंगुली उठा दी है। फिलहाल जिस तरह जलनिगम के अ धिकारियों ने गड़बड़झाला पर एक्शन लिया है, उससे कार्यदायी संस्था के अफसरों में हड़कंप मच गया है।