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राष्ट्रीय लोक अदालत में 27 हजार मुकदमे निस्तारित

Sat, 12 Dec 2015 11:19 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
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मुकदमों की पैरवी में वर्षों से कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहे लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत ने राहत प्रदान की है। इस दौरान 10 से 15 वर्ष पुराने मुकदमों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण हुआ। इससे वर्षों से भागदौड़ थम गई। वहीं कोर्ट में सुलह होने के बाद दोनों पक्षों ने राहत की सांस ली।
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राष्ट्रीय लोक अदालत से राजस्व, बीमा, बैंक आदि से संबंधित विभिन्न न्यायालयों में लंबित वाद कम हुए हैं। इससे जहां लोगों की राहत मिली है। वहीं कोर्ट में मुकदमों की संख्या का बोझ भी कम हुआ है।

कई ऐसे मामले भी हैं, जिसमें पैरवी में पीड़ित पक्ष को मानसिक तनाव के साथ ही आर्थिक नुकसान तक उठाना पड़ा। उनकी माने तो ऐसे लोक अदालतों से व्यर्थ की भागदौड़ ही नहीं बल्कि आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है।
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करीब 100 ऐसे मामले थे, जो 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित थे। लोक अदालत में फौजदारी, सिविल, राजस्व, स्टाम्प, मोटर दुर्घटना प्रतिकर आदि से जुड़े मामलों का सुलह समझौते से निपटारा हुआ।

वहीं 11 मोटर दुर्घटना प्रतिकर मामले का निस्तारण कर याचियों को प्रतिकर के चेक सौंपे गए। विभिन्न बैंकों की ओर से प्रीलिटिगेशन अदालत के जरिये 454 मामलों का निस्तारण किया गया।

देर शाम तक मिले आंकड़ों के अनुसार उत्तराधिकार के 36 मामले में एक करोड़ 19 लाख से अधिक राशि के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किए गए।

इस मौके पर एडीजे मोहम्मद हुसैन, आशीष गर्ग, अचल नारायण सकलानी, अखिलेश तिवारी, अशोक कुमार, सीजेएम इफराक अहमद, एसीजेएम अनुराग कुरील, परितोष श्रेष्ठ, अभिषेक उपाध्याय, वीरेंद्र सिंह आदि न्यायिक अधिकारियों ने मामलों का निस्तारण किया।

सलोन क्षेत्र के औसनहा मजरे सूची निवासी राजा भइया का पत्नी साधना से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इस पर पति ने कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी।

लोक अदालत के दौरान सुलह समझौते के आधार पर दोनों पक्ष अब साथ-साथ रहने को राजी हो गए हैं। इसी तरह से 1997 से लंबित गुजारा भत्ते के मामले में प्रेमा देवी ने अपनी पति राजाराम से 70 हजार रुपये भरण पोषण राशि के रूप लेते हुए मुकदमा समाप्त करने को सहमति दे दी।

बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा गेंगासो में ऋण संबंधी 10 साल पुराने मामले में जितेंद्र कुमार को राहत मिली। प्रतापगढ़ जिले के कुंभी आइमा सांगीपुर निवासी शाह आलम कहते है कि गुजारा का मामला 2008 से लंबित था।

लोक अदालत के कारण ही सुलह से पत्नी साथ रहने को तैयार हुई है। अब बेवजह की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। पूरे कैथन मजरे कल्याणपुर बैंती के शीतला प्रसाद का कहना है कि उनके पिता ने बैंक से लोन लिया था।

उनकी मौत के बाद मामला लंबित था। लोक अदालत के कारण ही ब्याज में काफी रियायत मिली है। शोभना का कहना है कि पति से गुजारा पाने के लिए काफी परेशान थी।

कोर्ट ने सुलह कराया तो अब राहत मिली है। नूरजहां का कहना है कि लोक अदालत से उन्हें पति का साथ मिला है। हमारा परिवार फिर से खुशहाल हो सकेगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव-सिविल जज सीनियर डिवीजन एसपी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत से स्थायी अदालतों में लंबित वादों की संख्या में कमी आई है।

वहीं दोनों पक्षों के बीच सुलह समझौते के कारण आपसी सामंजस्य भी बढ़ा है। इससे विवाद की स्थिति लगभग समाप्त हो जाती है।

लालगंज तहसील की सभी पटलों में राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। मेगा लोग अदालत के तहत कुल 2701 मामलों का निस्तारण किया गया। जिसमें दैवीय आपदा सहित राजस्व आदि के मामले शामिल हैं।

एसडीएम दिलीप कुमार त्रिगुणायत ने बताया कि राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत का आयोजन कर प्राथमिकता के आधार पर मामलों का निस्तारण किया गया।

जिन मामलों में कमी पाई गई उन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि एसडीएम कोर्ट में राजस्व के चार और फौजदारी के 192 वादों का निस्तारण किया गया।

तहसीलदार कोर्ट में 48, नायब तहसीलदार सरेनी कोर्ट में 26 व नायब तहसीलदार खीरों कोर्ट में 26 मामलों का निस्तारण किया गया।

इसके अलावा तहसील दिवस के 31, अविवादित वरासत के 145, दैवीय आपदा के 1033, सर्विस मैटर संबंधित चार, आय प्रमाण पत्र के 503, जाति प्रमाण पत्र के 312 और निवास प्रमाण पत्र के 327 मामलों का निस्तारण किया गया।
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