पेंशन के लिए जीवित प्रमाणपत्र जमा करने के लिए बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी पहुंचे। इस बार नई व्यवस्था शुरू की गई, लेकिन इसकी जानकारी न होने के कारण पेंशनरों को माथापच्ची करनी पड़ रही है।
जिले में 12 हजार पेंशनधारक हैं। सेवानिवृत्त कर्मियों को हर साल पेंशन पाने के लिए जीवित प्रमाणपत्र जिला कोषागार में जमा करना होता है।
एक नवंबर से 20 दिसंबर तक जीवित प्रमाणपत्र जमा किया जा रहा था। लेकिन इस बार इसमें बदलाव कर दिया गया है। अब पेंशनर एक साल में किसी भी समय अपना जीवित प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।
शासन की ओर से यह व्यवस्था तो शुरू कर दी गई है, लेकिन अधिकतर पेंशनरों को इसकी जानकारी नहीं है। एक नवंबर से जीवित प्रमाणपत्र जमा किए जा रहे हैं। इसके लिए अलग-अलग काउंटर खोले गए हैं।
बुधवार को जीवित प्रमाणपत्र जमा करने के लिए पेंशरों की भारी भीड़ जुटी। कोई अपने पोते तो कोई बहू या फिर अन्य परिवारीजनों के साथ जीवित प्रमाणपत्र जमा करने पहुंचा।
इसमें महिला सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल रहीं। कोई चलने फिरने में लाचार था तो किसी को आंखों से कम दिखाई पड़ रहा था। इसलिए उन्होंने अपने परिवारीजनों से जीवित प्रमाणपत्र भरवाया।
रसूलपुर की गुरु प्यारी देवी, चिलौला की शिवकली, बछरावां के रामखेलावन कुरील
और शहर के अंदरुनकिला के मो. रजा सिद्दीकी कहते हैं कि हर साल में जीवित
प्रमाणपत्र जमा करना पड़ता है।
आने-जाने में कष्ट तो होता है, लेकिन आना तो
मजबूरी हैं। जीवित प्रमाणपत्र नहीं जमा करेंगे तो पेंशन नहीं आएगी। पेंशन
नहीं आएगी तो रोजी-रोटी कैसे चलेगी।
जानकारी भी नहीं थी कि एक साल में किसी
भी समय जीवित प्रमाणपत्र जमा किया जाना है। अब पता चला है तो प्रमाणपत्र
जमा कर दूं, ताकि एक साल के लिए फुर्सत मिल जाए।
वरिष्ठ कोषाधिकारी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी का कहना है कि नई व्यवस्था के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारी ने जिस माह में अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा किया है।
अगले साल उसी माह की तारीख के पहले किसी भी समय जीवित होने का प्रमाणपत्र दे सकते हैं। वैसे प्रमाणपत्र जमा किए जाने लगे हैं। पेंशनर जीवित प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।