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जगतपुर रजबहा उफनाने से पटरी कटी, खेतों में भर रहा पानी

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पटरी कटने से बहता पानी। - फोटो : RAIBARAILY
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जगतपुर (रायबरेली)। ब्लॉक क्षेत्र से होकर निकले जगतपुर रजबहे की पटरियां जर्जर हैं। रजबहे में ज्यादा पानी आने की वजह से आए दिन कहीं न कहीं कटान हो जाती है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।
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रजबहे की पटरियां जर्जर है। इस वजह से जब ज्यादा पानी आ जाता है, तो कटान हो जाती है। किसानों ने रजबहे की पटरियों की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
कटान होने से पानी संपर्क मार्ग से होकर खेतों में भर रहा है। अब तक 20 बीघा के करीब धान की फसल में पानी भर गया है। यदि कटान को बंद नहीं कराया गया तो और ज्यादा कटान हो जाएगी।
शारदा सहायक से निकला जगतपुर रजबहा में पटरियों की भराई नहीं होने से पानी रिसता रहता है। रिसते-रिसते पानी तेज बहने लगता है। यही हाल मनोहरगंज के पास हुआ है। यहां पर कई दिनों से पानी रिस रहा था। अब ज्यादा कटान हो गई।
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पटरियों पर बने संपर्क मार्ग से होते हुए पानी खेतों में भर रहा है। सड़क पर पानी भरने से सड़क खराब होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। किसान पप्पू, बुधेंद्र कुमार, रोहित, राम प्रसाद ने बताया कि पटरियों की भराई ना होने से यह समस्या बनी रहती है।
जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। सिंचाई खंड दक्षिणी के अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार वर्मा ने बताया कि किसान खेतों की सिंचाई करने के लिए नहर की पटरी काट देते हैं।
पटरी नहीं बांधने की वजह से कटान ज्यादा हो जाती है। कई बार किसानों से कुलाबे से ही सिंचाई करने की बात कही गई, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जाता। पटरी कटान को बंधवाया जाएगा।
टेल तक नहीं पहुंचता पानी, किसान परेशान
राही। युवा कांग्रेसी नेता नेता मोहित सिंह ने सिंचाई विभाग पर गंभीर आरोप लगाए है। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी नहरों की सफाई के नाम पर आने वाले धन का बंदरबांट करते हैं।
यही वजह है कि किसानों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। मुंशीगंज में एक प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि जगतपुर रजबहा में कई वर्षों से टेल तक पानी नहीं पहुंचा है। कहने को तो सफाई हर साल होती हैं, लेकिन सिल्ट सफाई का धन बंदरबांट किया जाता है।
डीजल पेट्रोल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी मार किसानों को झेलने पड़ रही है। 100 रुपये प्रतिघंटा सिंचाई की जगह अब 200 रुपये प्रतिघंटे के हिसाब से निजी नलकूप चालकों को देना पड़ रहा है। 600 प्रतिघंटा खेतों की जुताई की जगह अब एक हजार प्रतिघंटे ट्रैक्टर चालकों को देना पड़ रहा है। सरकार किसानों की आय दुगनी करनी की बात कहती है, लेकिन अब लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है।
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