रायबरेली। भदोखर थाना क्षेत्र के कुचरिया गांव के पास शारदा नहर में फेंकी गई होम्योथिक दवाओं की जांच शुरू हो गई है। प्रथम दृष्टया जांच में संबंधित बैच नंबर की दवाएं रायबरेली जिले की नहीं मिलीं। दूसरे जिले से लाकर दवाओं को यहां नहर में फेंका गया। दवाएं एक्सपायर्ड नहीं हैं। जिला होम्योपैथिक अधिकारी ने उच्चाधिकारियों के साथ ही डीएम को रिपोर्ट भेज दी है।
मंगलवार को सोशल मीडिया में शारदा नहर में दवाएं फेंके जाने का वीडियो वायरल हुआ था। सूचना पर ड्रग इंस्पेक्टर शीवेंद्र प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। सभी दवाएं आयुष विभाग से संबंधित मिली। दवाओं की शीशियों पर फॉर यूपी गवर्नमेंट सप्लाई, स्टेट आयुष सोसायटी, नॉट फॉर सेल लिखा मिला। इसकी सूचना रात में ही उन्होंने जिला होम्योपैथी अधिकारी को दी।
बुधवार को होम्योपैथी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। नहर के किनारे मिली दवाओं की शीशियों पर लिखे बैच नंबर को नोट किया। बाद में राजकीय आयुष मिशन के तहत शासन से जिले को मिली होम्योपैथिक दवाओं की जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि संबंधित बैच नंबर की दवाएं जिले को आपूर्ति नहीं की गई थी। सभी राजकीय अस्पतालों में भी संबंधित बैच की दवाओं की चेकिंग कराई गई, लेकिन दवा की पुष्टि नहीं हुई। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है।
रायबरेली में क्यों फेंकी गईं दवाएं...
शासन स्तर से जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शारदा नहर में मिली दवाएं किस जिले को आपूर्ति की गई थीं, लेकिन दवाएं बरामद होने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। इन दवाओं को बाहर से लाकर रायबरेली में क्यों फेंका गया। कहीं दवाएं प्रयोगशाला की जांच में नकली तो नहीं हैं या फिर चोरी करके दवाओं को यहां लाया गया। जांच पूरी होने के बाद ही सभी सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
नहर में मिली दवाओं की जांच कराई गई। संबंधित बैच की दवाएं जिले को आपूर्ति नहीं हुई थीं। शासन स्तर से जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा, कि नहर में फेंकी गईं दवाएं किसी जिले की हैं। डीएम को भी रिपोर्ट दी है।
- डॉ. संदीप गर्ग, जिला होम्योपैथिक अधिकारी