डलमऊ/ऊंचाहार (रायबरेली)। कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। भोर से ही गंगा में स्नान करने श्रद्धालु पहुंच गए थे। जिले के तकरीबन 25 घाटों पर 10 लाख से अधिक लोगों ने डुबकी लगाई।
घाटों पर नाव के साथ गोताखोर भी तैनात रहे। डलमऊ में श्रद्घालुुओं को गंगा स्नान करने के लिए कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। वाहनों को करीब तीन किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया।
जिले के डलमऊ के किलाघाट, सड़क घाट, रानी शिवाला घाट, पक्का घाट, संकट मोचन घाट, पथवारी घाट पर तड़के से ही भक्तों ने पहुंचकर गंगा स्नान किया।
ऊंचाहार क्षेत्र के गोकना, गोलाघाट, बादशाहपुर, पूरे तीर, खरौली व कोटरा बहादुरगंज के गंगा घाटों पर भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। जिले के सभी घाटों पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गंगा में स्नान किया।
मेले का उठाया लुफ्त, खूब बिके गोल-गप्पे, जलेबी और चाट
गैर जिलों से आए श्रद्धालुओं ने डलमऊ में पड़ाव डाल दिया है। श्रद्धालुआें ने मेले में सजी दुकानों पर खरीदारी के साथ मनोरंजन के कार्यक्रमों का लुफ्त उठाया।
वहीं पुरुषों ने लाठियां, बैलों के घुंघरू और युवतियों ने सौंदर्य प्रसाधन की खरीदारी की। बच्चों ने खेल खिलौने आदि की खरीद की। मेले में सजी जलेबी और चाट की दुकानों ने लोगों को खूब लुभाया। महिलाओं ने गोलगप्पे और चाट टिक्की तथा बच्चों ने आइसक्रीम का मजा लिया।
भक्तों ने पूजा के साथ ली गुरु दीक्षा, प्रवचन सुन प्रसाद छका
डलमऊ मेले में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संस्कृत महाविद्यालय बड़ा मठ में गुरु पूजा और गुरु दक्षिणा तथा गुरु दीक्षा का कार्यक्रम हुआ। भक्तों ने गुरु की आरती के साथ गुरु को दक्षिणा दी।
स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि करीब दो दर्जन से अधिक भक्तों ने गुरु दीक्षा प्राप्त कर स्वामी देवेंद्र आनंद गिरि को अपना गुरु स्वीकार किया। डलमऊ के स्वामी देवेंद्र आनंद गिरी की अध्यक्षता में आयोजित धार्मिक प्रवचन कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं मौजूद रहे। भक्तों ने प्रसाद भी छका।
शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि मांगी
ऊंचाहार के गोकना घाट पर गुरुवार रात से शुक्रवार शाम तक करीब तीन लाख से अधिक लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। मेले में जिले के साथ ही अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी व फतेहपुर आदि जिलों से लोग पहुंचे। मां गंगे को पुष्प, बेलपत्र, दूध अर्पित किया। धूप, दीप, नैवेद्य, फल चढ़ाकर अपने परिवार की सुख समृद्धि मांगी। घाट पर स्थित भगवान शिव के मंदिरों में भी जलाभिषेक किया।
रूट डायवर्जन से हुए परेशान, पैदल चलकर पहुंचे घाट
ऊंचाहार, ऊंचाहार, सरेनी सहित सभी गंगा घाटों पर मेले की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। घाट पर स्नान के दौरान निगरानी के लिए नावें लगी थी। गोताखोर भी दिनभर डटे रहे। डलमऊ के सराय दिलावर के पास अस्थाई बस स्टैंड बनाया गया। यहां से श्रद्धालुओं को पैदल ही गंगा घाट तक पहुंचना पड़ा। रूट डायवर्जन के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
खोया-पाया केंद्र ने 113 बिछड़े लोगों को मिलाया
डलमऊ मेले में आए हुए अपने से बिछड़े को मिलाने में खोया पाया की अहम भूमिका रही। मेला कोतवाली परिसर में बनाए गए खोया पाया केंद्र पर लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से अपने से बिछड़े हुए लोगों को मिलाने का कार्य किया गया। शाम तक 113 अपने से बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को एक दूसरे से मिलाने का कार्य किया गया।
जगतपुर में डलमऊ मार्ग को रखा गया बंद
डलमऊ में भीड़ को देखते हुए जगतपुर से बड़े वाहनों को गत गुरुवार से डलमऊ मार्ग पर प्रतिबंधित कर दिया गया। रातभर वाहनों को रोकने के साथ ही शुक्रवार को दिनभर बड़े वाहनों को डलमऊ मार्ग पर जाने नहीं दिया गया। कोतवाल जगतपुर जितेंद्र सिंह पूरी टीम के साथ चौराहा पर बैरियर लगाकर डटे रहे। इसके अलावा डलमऊ और गोकना की ओर जाने वाले अन्य मार्गों से भी वाहनों का डायवर्जन किया गया।
सरेनी। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा गेगासों घाट पर हर हर गंगे के उद्घोष के साथ भक्तों ने गंगा में डुबकी लगाई। विधि विधान से मां गंगा व मां संकटा की पूजा अर्चना किया। रालपुर घाट में भी हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया और मनकामेश्वर धाम में पूजा अर्चना किया। कलाइयां खेड़ा, निसगर घाटों में भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। गेगासो में एसडीएम विजय बहादुर, नायब तहसीलदार सीपी पांडेय, कोतवाल अनिल सिंह, कानूनगो सत्य भवन शुक्ला आदि ने दिनभर नजर रखी।