फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कई बैंकों में सन्नाटा पसरा

Fri, 30 Dec 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला/रायबरेली
विज्ञापन
बैंक में जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
 नोट बदलने का आखिरी दिन होने के चलते उम्मीद के विपरीत बैंकों में शुक्रवार को कामकाज सामान्य ढंग से हुआ। कहीं पूरी तरह सन्नाटा पसरा दिखा तो कहीं नोट जमा करने के लिए आए लोगों की कतारें भी लगी दिखीं।
विज्ञापन


शुरुआती दिनों में नजर आने वाली अफरातफरी जैसा माहौल कहीं भी नहीं दिखा। उधर, विभिन्न बैंकों में भी कमोवेश यही नजारा रहा। नोट जमा होने के आखिरी दिन का नजारा लेने निकली अमर उजाला टीम को कई एटीएम बूथों पर सन्नाटा मिला तो कहीं इक्का-दुक्का लोग ही नजर आए। इस दौरान कुछ बूथ ऐसे भी मिले, जिनके शटर आठ नवंबर से आज तक नहीं खुले। प्रस्तुत है नोटबंदी के आखिरी दिन का हाल। 

सुपर मार्केट स्थित स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के अंदर दोपहर में काफी भीड़ रही। लोग नोट लेने व जमा करने के लिए कतार में लगे नजर आए। यहां कुछ लोग पैसा निकालने भी आए थे। बैंक कर्मी यहां सामान्य दिनों की तरह ही काम करते रहे। हालांकि किसी के पास बड़ी रकम तो नहीं थी, लेकिन हर कोई कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करता नजर आया।
विज्ञापन


नोट बदलने के बाद लाइन से निकले खाताधारक रामेंद्र ने बताया कि उसे नोट जमा करने में कोई परेशानी नहीं हुई। थोड़ा कुरेदने पर उसने बताया कि शुरुआत में करेंसी कमी की वजह से उसे परेशानी जरूर हुई, लेकिन अब आसानी से करेंसी मिल जाती है। निकासी कम जरूर है, लेकिन जो भी निकल रहा है उसे काम चलाया जा रहा है। 

कैनाल रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। यहां पैसा जमा करने व निकालने के लिए कुछ लोग ही नजर आए। बैंक परिसर के अंदर व बाहर पूरी तरह सन्नाटा रहा। यहां मिली महिला ग्राहक सोनाली ने बताया कि वह पैसा निकालने आई हैं ।

नोटबंदी के बाबत पूछने पर बताया कि इससे उसे थोड़ी परेशानी हुई है। पर अब हालात सुधर रहे हैं। उसने नोटबंदी को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार को कुछ ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए थी, जिससे जनता को कोई परेशानी न होती। इससे सबसे ज्यादा परेशान जनता ही हुई है। शाखा प्रबंधक शांतनु ने बताया कि उनके बैंक में ग्राहकों को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई । 

आंख अस्पताल के निकट एचडीएफसी शाखा में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा था। अमर उजाला टीम को यहां मात्र तीन लोग ही नजर आए। सभी पैसा निकालने आए थे। बैंक के बगल में बने एटीएम में भी कोई भीड़ नहीं थी।

शाखा प्रबंधक अमित श्रीवास्तव ने बताया कि नोटबंदी के दौरान भी यहां ग्राहकों को परेशानी नहीं हुई। बैंक की ओर से सभी खाताधारकोें को सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। यहां तक कि एटीएम के बाहर महिलाओं, पुरुषों और सीनियर सिटीजन के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई थी। एटीएम से निकासी के दौरान होने वाली परेशानी से खाताधारकों को बचाने के लिए बैंक कर्मी लगाए गए थे। 

हाथी पार्क के निकट बैंक ऑफ बड़ौदा में भी अमर उजाला टीम को थोड़ी बहुत भीड़ नजर आई। फिर भी धक्का-मुक्की जैसा कोई नजारा नहीं दिखा। यहां लगे एटीएम में पैसा निकालने के लिए तीन-चार लोग ही नजर आए।

यहंां मिले खाताधारक अवनीश ने बताया कि उसे शुरुआत में पैसा निकालने में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ा। हालांकि इस समय पैसा आसानी से मिल जाता है। लेकिन एटीएम से अब भी सीमित पैसा मिल पाता है। इसलिए उसे अलग से विड्राल के जरिए पैसा निकालने को आना पड़ता है। नोटबंदी के बारे मेें कहा कि इसके पहले सरकार को अच्छी तरह होमवर्क कर लेना था। क्योंकि सर्वाधिक परेशानी आम जनता को हुई है। 

विभिन्न बैंकों में मिले ग्राहकों ने नोटबंदी व नोट जमा को लेकर अलगअलग विचार व्यक्त किए। जितेंद्र बहादुर, रमेश कुमार व रमाकांत ने बताया कि उसे नोट जमा करने में कोई परेशानी नहीं हुई। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, जो भी 500- 1000 की नोटें थीं उसे पहले ही जमा कर दिया था। इसी तरह महिला खाताधारक हेमलता, राजरानी व शुभ्रा ने बताया कि उनके पास जो भी पैसे थे उन्होंने शुरू में ही जमा कर दिए थे। उस समय भीड़ जरूर थी लेकिन किसी तरह जमा कर दिया था।  

नोट जमा करने के आखिरी दिन अमर उजाला टीम ने शहर के कई एटीएम बूथों का जायजा लिया। हाथी पार्क स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम पर ज्यादा भीड़ नहीं थी। सभी लोग कतार से पैसा निकालते नजर आए। इसी तरह बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक के एटीएम पर भी काफी कम लोग नजर आए।

यहां मिले लोगों ने बताया कि अब पैसा निकलने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। हालॉकि कम पैसा निकलने पर वे दुखी भी नजर आए। उनका कहना था कि निकासी धन की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। क्योंकि 2000 रुपये जल्दी खर्च हो जाते हैं। उन्हें फिर लाइन में लगना पड़ता है। इ

स दौरान कुछ ऐसे एटीएम भी मिले जो आठ नवंबर से खुले ही नहीं। इनमें चंदापुर भवन के पास लगा केनरा बैंक और विकास प्राधिकरण के निकट एक्सिस बैंक का एटीएम शामिल है। इन एटीएम के पास दुकान करने वाले लोगों ने बताया कि इनका शटर नोटबंदी के बाद से आज तक उठा ही नहीं। जिले में लगे कुल एटीएम की संख्या 307 है। इनमें 108 एटीएम शहर में लगे है, शेष 199 ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैं। इनमें अधिकांश बंद चल रहे हैं। शहर में 108 के सापेच मात्र 18 एटीएम ही चल रहे है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें