फर्जी शासनादेश के सहारे हुए विधायक निधि में करोड़ों रुपये के घोटाले के मास्टर माइंड व तत्कालीन तकनीकी अन्वेषक अरुण शुक्ला को निलंबित कर दिया गया है।
मामले में मास्टर माइंड के दो साथियों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। हाईकोर्ट की शरण लेने के कारण मुख्य आरोपी पर केस दर्ज नहीं हो सका था।
ग्राम्य विकास आयुक्त ने सोमवार को उसे निलंबित करने के साथ ही सीडीओ को उसके खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए है। वर्ष 2012-13 में फर्जी शासनादेश के माध्यम से विधायक निधि में सवा चार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था।
लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट आने के बाद अनुसचिव ओमप्रकाश तिवारी ने 23 अक्तूबर 2013 को अरुण शुक्ला, अशोक त्रिपाठी, रामकेश सोनकर पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
साथ ही अरुण के निलंबन और आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। मास्टर माइंड अरुण ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके कारण उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
हाईकोर्ट में दोनों याचिकाएं खारिज होने के बाद अनुसचिव प्रभात कुमार ने बीती 25 जून को आदेश जारी करके एक सप्ताह में मास्टरमाइंड पर 23 अक्तूबर 2013 को दिए गए आदेश के संबंध में कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
ग्राम्य विकास आयुक्त कामरान रिजवी ने सोमवार को घोटाले के मास्टर माइंड व तत्कालीन तकनीकी अन्वेषक (वर्तमान में हमीरपुर जिले में तैनात) निलंबित करते हुए अंतिम जांच हमीरपुर के पीडी को सौंपी है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सीडीओ को एक सप्ताह में आरोपपत्र तैयार करके भेजने के आदेश दिए हैं। पीडी इंद्रसेन सिंह ने बताया कि मामले में जो निर्देश मिले हैं, उसमें कार्रवाई करके शासन को आरोपपत्र भेजा जाएगा।