रायबरेली। शहर में नर्सिंगहोम के लाइसेंस रेवड़ियों की तरह बांटे गए हैं। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मानकों को ताक पर रखकर अस्पताल के लाइसेंस दे दिए। करीब 50 अस्पताल अवैध भवनों में संचालित हैं। इन भवनों के मैप प्राधिकरण से पास नहीं है। कइयों में फायर फाइटिंग सिस्टम तक नहीं लगाए गए हैं।
शहर के नेहरू नगर क्रॉसिंग से अमोल विहार तक, बरगद चौरहा, कानपुर रोड, कचहरी रोड सहित अन्य स्थानों पर निजी अस्पताल संचालित हैं। कहीं बेसमेंट में तो कहीं दूसरी मंजिल पर कई अस्पताल संचालित हैं।
शासन से बेसमेंट और दूसरी मंजिल पर अस्पताल संचालित करने पर रोक लगी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लाइसेंस देने में जुटे हैं। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को मानकों की जांच करने के बाद लाइसेंस जारी करने के आदेश हैं, इसके बाद भी अनदेखी की गई। सेटिंग-गेटिंग कर पहले लाइसेंस दिया और बाद में पांच-पांच साल के लिए नवीनीकरण भी कर दिया गया।
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अस्पताल संचालकों को मिला आरडीए का नोटिस बेअसर
रायबरेली विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में अवैध भवनों में संचालित निजी अस्पतालों के संचालकों को नोटिस दिए गए, लेकिन नोटिस का कोई असर संचालकों पर नहीं पड़ा है। कुछ संचालकों ने आरडीए को जवाब दिए, लेकिन कुछ लोगों ने जवाब देना भी उचित नहीं समझा। आरडीए भी भवनों को वैध करने के मामले में चुप्पी साधे बैठा है। आरडीए के सचिव विशाल यादव का कहना है कि शहर में नर्सिंगहोम संचालकों को भवनों को वैध कराने के लिए नोटिस दिए गए हैं। भवनों का मैप पास न कराने पर कार्रवाई की जाएगी।
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अग्निशमन विभाग ने कसा शिकंजा
शहर में संचालित निजी अस्पतालों में मानकों को पूरा कराने में भले ही स्वास्थ्य विभाग नाकाम है, लेकिन अग्निशमन विभाग ने संचालकों पर शिकंजा कसा है। सभी को आग से निपटने की व्यवस्था कराने के साथ ही एनओसी लेने के आदेश दिए गए हैं। विभाग के गंभीर हाेने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने भी बिना फायर एनओसी के लाइसेंसों का नवीनीकरण करने का निर्णय लिया है।
एसीएमओ अंबिका प्रकाश को मानकों की जांच के बाद ही अस्पताल का लाइसेंस देने का आदेश दिया गया है। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. नवीनचंद्रा, सीएमओ रायबरेली