रायबरेली। अमेठी जिले के पूरे लंगड़ा मजरे पाकरगंज गांव में फर्जी अंगूठा लगाकर जमीन की वसीयत कराने वाली महिलाओं ने उसे पूर्व मंत्री सुरेश पासी की पत्नी सरिता को बेच दिया। सप्तम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन सृष्टि शुक्ला ने सुनवाई करते हुए वसीयत को ही निरस्त कर दिया। तिलोई तहसील में भी बैनामे के बाद दाखिल-खारिज पर आपत्ति लगाई गई है। ऐसे में पूर्व मंत्री की पत्नी की जमा पूंजी भी फंस गई है।
गांव निवासी प्यारेलाल की 13 जनवरी 2017 को मौत हो गई थी। इसके बाद मीना कुमारी व श्याम कुमारी ने उप निबंधन कार्यालय तिलोई में 24 अप्रैल 2018 को वसीयत पंजीकृत कराई। प्यारेलाल के भाई मिश्रीलाल ने कोर्ट पहुंचकर वसीयत का विरोध जताया। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेकर फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ से जांच कराई।
प्यारेलाल के 23 जुलाई 1995 में किए गए बैनामे और 24 अप्रैल 2018 के वसीयत में लगे अंगूठे में अंतर मिला। इसी आधार पर सप्तम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन सृष्टि शुक्ला ने वसीयत को निरस्त कर दिया। वहीं, फर्जी वसीयत कराने वाली मीना कुमारी व श्याम कुमारी ने जमीन को अपने नाम कराने के बाद 29 जनवरी को संबंधित भूमि का बैनामा गांव की ही सरिता देवी पत्नी सुरेश पासी को बेच दिया।
मिश्रीलाल के अधिवक्ता का कहना है कि महिलाओं ने फर्जी अंगूठा लगाकर जमीन की वसीयत कराई थी। कोर्ट ने वसीयत को निरस्त कर दिया है। उक्त जमीन का बैनामा कराने वाली सरिता के पति भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं।