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निराला स्मृति समारोह में नौ साहित्यकार सम्मानित

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ग्रंथों का विमोचन करते अतिथिगण। - फोटो : RAIBARAILY
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डलमऊ (रायबरेली)। निराला स्मृति संस्थान मुराईबाग की ओर से तहसील के सामने निराला स्मारक स्थल पर रविवार को आयोजित सम्मान समारोह, ग्रंथ विमोचन और कवि सम्मेलन में साहित्यकारों का जमावड़ा रहा। इस मौके पर नौ रचनाकार सम्मानित किए गए तो सात ग्रंथों का विमोचन भी हुआ। कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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देवेद्रानंद गिरि महराज की अध्यक्षता और रामनिवास पंथी के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और निराला की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. ओमप्रकाश सिंह (पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, बैसवारा पीजी कॉलेज लालगंज) एवं अवधेश सिंह (पूर्व अध्यक्ष, जिला पंचायत रायबरेली) समेत अन्य वक्ताओं ने महाप्राण निराला का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके व्यक्तित्व और उनकी कविताओं का विस्तार से वर्णन किया। इस मौके पर बृजेशदत्त गौड़, कृपाशंकर द्विवेदी, भारती शरण द्विवेदी, दिनेश कुमार यादव, पप्पू सोनी, संदीप चौधरी, राजेंद्र व्यास, रामेश्वर यादव, शिवनाथ यादव आदि मौजूद रहे।
इन रचनाकारों का हुआ सम्मान
समारोह में नौ रचनाकारों को सम्मान से नवाजा गया। निराला स्मृति संस्थान के अध्यक्ष देवेंद्रानंद गिरि महराज और संयोजक रामनिवास पंथी ने निराला स्मृति सम्मान से डॉ. आजेंद्र प्रताप सिंह, मनोहरा देवी स्मृति सम्मान से डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज, सरोज स्मृति सम्मान से डॉ. मंजू मृदुल, मुल्ला दाऊद स्मृति सम्मान से सूर्यप्रसाद शर्मा निशिहर, चक्रवर्ती राजा डाल देव स्मृति सम्मान से शत्रुहन सिंह चौहान, राजाराम भारतीय स्मृति सम्मान से विजय चितौरी एवं शिव बहादुर सिंह दिलबर, गीतकार जवाहर इंदु स्मृति सम्मान से डॉ. सुखदेव प्रसाद छैल एवं लखन प्रतापगढ़ी को सम्मानित किया।
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इन ग्रंथों का हुआ विमोचन
कार्यक्रम में साथ ग्रंथों का विमोचन किया गया। इनमें डा. ओमप्रकाश सिंह की दो कृतियां साहित्य चिंतन और समकालीन नवगीत समीक्षात्मक आकलन, डॉ. आजेंद्र प्रताप सिंह की पुस्तक बैसवारा और महाकवि निराला समग्र (जीवन वृत्त एवं काव्य समीक्षा खंड), रामनिवास पंथी एवं डॉ. मंजू मृदुल के संपादन में प्रकाशित भारतीय संतों की कीर्ति कथाएं, रामनिवास पंथी एवं डॉ. आजेंद्र प्रताप सिंह की पुस्तक व्यक्तित्व और विचार (स्वामी गीतानंद गिरि), रामनिवास पंथी एवं रावेंद्र कुमार के संपादन में प्रकाशित आनंदोपासना (स्वामी गीतानंद गिरि), शिव कुमार शिव एवं डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज के संपादन वाली कृति जीवन की रागिनी (स्वामी गीतानंद गिरि) शामिल रही।
...मंद चल रही पुरवा बयार है
कार्यक्रम की अंतिम कड़ी के रूप में हुए कवि सम्मेलन में डॉ. मंजू मृदुल ने मुसीबत में हमेशा मां याद आती है.. रचना से खूब वाहवाही बटोरी। आचार्य निशिहर ने कहा- छेड़छाड़ प्रकृति ते करिहो जो ज्यादा, कसी शिकंजा मा उफरियों जो ज्यादा। बृजेंद्रनाथ त्रिपाठी ने कहा- उतर जाएगा यह सोने का पानी अंततोगत्वा, उभर आएगी फिर पीतल पुरानी अंततोगत्वा। प्रतिभा इंदु ने अपनी रचना में कुछ इस तरह बात कही- आज धरा ने किया अनुपम शृंगार है, मंद चल रही पुरवा बयार है। अंकुर सिंह ने कहा- मेरी मां सुबह जब जग आती है मुझको, तो थोड़ा सा गुस्सा दिखाती है मुझको। राजेंद्र बहादुर सिंह राजन ने यह जो कविता है मन की तड़पन.. पंक्तियों वाली रचना सुनाई।
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