महान कवि मलिक मोहम्मद जायसी की जन्मस्थली में सोमवार को जायसी महोत्सव का शानदार आगाज हुआ। इसमें न सिर्फ गीत, संगीत की महफिल सजी, बल्कि आलम यह था कि लोग तबलों की धुन पर थिरकने का मजबूर हो गए। प्रदेश के काबीना मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति भी समारोह में शामिल हुए।
जायस कस्बा स्थित मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान में आयोजित समारोह में हिंदू-मुस्लिम एकता की झलक देखते ही बनी। कार्यक्रम में हर वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
अमेठी जिले के डीएम और मुख्य अतिथि जगतराज त्रिपाठी ने फीता काट कर जायसी महोत्सव का उद्घाटन किया। इसके बाद विकास गोष्ठी हुई। मंत्री गायत्री प्रजापति ने कहा कि जायस में ऐसा महोत्सव पहली बार हुआ है।
आगे भी इसका आयोजन होता रहेगा। इसके लिए शासन से भी मदद दिलाई जाएगी। मुख्य अतिथि डीएम ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आपसी सौहार्र्द और भाईचारा बढ़ता है।
सीडीओ ओम प्रकाश ने कहा कि समारोह में हिंदू और मुस्लिम एकता की झलक देखने को मिली। ऐसा आयोजन हर साल किया जाएगा।
एडीएम प्रशासन एसएन यादव, एसडीएम तिलोई सूर्यकांत त्रिपाठी, एसडीएम गौरीगंज वंदिता श्रीवास्तव, सीओ मधुबन कुमार सिंह ने कहा कि जायस का कवि मलिक मोहम्मद जायसी की जन्मस्थली में होना सभी के लिए गौरव की बात है।
विकास गोष्ठी के बाद विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आगाज हुआ, जो देर रात तक चला। इस मौके पर गौरीगंज विधायक राकेश सिंह, तिलोई विधायक डॉ. मुस्लिम, शाहगढ़ ब्लॉक प्रमुख दीपक सिंह, भवानी दत्त दीक्षित, प्रदीप सिंह, चंद्रकांत दुबे मौजूद रहे।
समारोह में काबीना मंत्री गायत्री प्रजापति ने अमेठी के जिला अस्पताल को कवि मलिक मोहम्मद जायसी का नाम देने की घोषणा की। यह अस्पताल जिला मुख्यालय गौरीगंज में बनना है। मंत्री ने डीएम जगतराज त्रिपाठी को इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के लिए निर्देश दिए।
भजन कार्यक्रम की शुरूआत एसपी अमेठी हीरालाल ने भजन गाकर की। जब उन्होंने हारमोनियम बजाना शुरू किया तो पहले तो कुछ देर तक लोग उन्हें देखते रहे, फिर भजनों में खो गए। इसके बाद प्रतापगढ़ के विनीत सिंह ने अपने भजनों से समारोह में शमा बांधा।
कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से कानपुर से बुलाए गए तबला वादक राधे महराज ने भी समारोह में रौनक डाल दी।
जायसी महोत्सव में हुआ कवि सम्मेलन सभी के दिलों को झकझोर गया। कवि डॉ. आनंद ओझा की कविता बीबी कहती है पाया क्या, बच्चा कहता है लाया क्या है, घर पहुंचने पर मां ये पूछे दिन भर बेटे खाया क्या, सुनकर लोगों की आंखें भर आई।
गजेंद्र सिंह प्रियांशू ने सुनाया....आदमी न हुए कालाधन हो गए, मुझसे छुड़ा कर कहां हो गए। फारुख सरल ने बताओ रमजानी अब का करिहौं, बताऔ दिलजानी अब का करिहौं, चलि गै परधानी अब का करिहौं...सुनाया। इसके अलावा अनिल बौझड़, सबिस्ता ब्रजेश ने भी कविताएं सुनी। वहीं जामो से आए कलाकार त्रिपुरारी पांडेय व शिवदत्त पांडेय ने मनमोहक कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया।