रायबरेली। मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में जेल भेजे गए राम किशोर को निर्दोष साबित करने में 11 साल लग गए। वर्ष 2015 में रामकिशोर को जेल भेजने वाली लालगंज पुलिस कोर्ट में आरोपों को सिद्ध करने में नाकाम रही। मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए सप्तम अपर मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार ने आरोपी को निर्दोष होने का फैसला सुनाया है।
लालगंज पुलिस ने चार मई 2015 को क्षेत्र के खजांव निवासी रामकिशोर को 12 पुड़िया हिरोइन के साथ गिरफ्तार करके जेल भेजा था। बद में रामकिशोर जमानत पर रिहा हुआ। उसे स्वयं को निर्दोष साबित कराने के लिए 11 साल तक मुकदमा लड़ना पड़ा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रामकिशोर को गिरफ्तार करने में पुलिस की कई खामियां उजागर हुईं।
19 दिन बाद हिरोइन को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। इस दौरान इसे कहां रखा गया। यह बात पुलिस न्यायालय को बता पाने में सफल नहीं हो सकी। इसी तरह पुलिस की अन्य कई खामियां भी सामने आईं। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने रामकिशोर को आरोपों से बरी कर दिया।