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इमरजेंसी में महंगी दवाएं व इंजेक्शन लिखने की जांच शुरू, बयान दर्ज

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रायबरेली। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के नाम पर मरीजों के शोषण और बाजार से महंगी दवाएं खरीदवाने के काले कारोबार की जांच शुरू हो गई है। चीफ फार्मासिस्ट जीडी शुक्ला की शिकायत पर डॉ. बीरबल सहित दो डॉक्टरों की टीम ने आठ लोगों के बयान दर्ज किए हैं। कई और लोगों के बयान लेने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट सीएमएस को सौंपेगी।
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जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट जीडी शुक्ला ने मंगलवार को सीएमएस को पत्र देकर आरोप लगाया था कि इमरजेंसी में आने वाले गरीब मरीजों के इलाज के नाम पर मनमानी की जा रही है। इमरजेंसी के डॉक्टर बाजार से महंगी दवाएं और इंजेक्शन मरीजों से मंगवाते हैं।
यहां तक कि बाजार से सीटी स्कैन के लिए भी मरीजों को भेजा जा रहा है। चीफ फार्मासिस्ट ने ऐसी स्थिति में इमरजेंसी में काम करने में असमर्थता जताते हुए प्रभारी इमरजेंसी के पद से मुक्त किए लाने का अनुरोध किया था।
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मामले में सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने जांच के लिए डॉ. बीरबल और डॉ. वीपी शर्मा की टीम गठित की है। टीम ने गुरुवार से जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता समेत इमरजेंसी में काम करने वाले आठ लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
कई और लोगों के बयान लेने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट सीएमएस को सौंपेगी। सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि टीम ने जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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