रायबरेली। कपलिंग खुलने से मालगाड़ी के दो हिस्सों में बंट जाने के मामले में हुई प्राथमिक जांच का कोई नतीजा नहीं निकल सका। जांच समिति में शामिल तीनों सदस्यों की राय अलग-अलग है। इसी कारण कोई केस भी दर्ज नहीं किया गया है। जांच आख्या मंडलीय अधिकारियों को भेज दी गई है। यदि मंडलीय अधिकारी जांच से संतुष्ट हो गए तो ठीक है, वरना मंडल स्तर से पुन: जांच कराई जा सकती है।
रविवार को ऊंचाहार की ओर से क्लिंकर लेकर एक मालगाड़ी रायबरेली आ रही थी, जिसे कुंदनगंज जाना था। रायबरेली पहुंचने से कुछ दूर पहले ही सिविल लाइन में मालगाड़ी को कुछ देर रोका गया था। दोबारा यह मालगाड़ी चली तो कई वैगन पीछे छूट गए। इस बात का पता चलते ही मालगाड़ी रोकी गई। लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर (गार्ड) ने छानबीन की तो कपलिंग खुलना पाया गया, जिसके बारे में नजदीकी स्टेशन को जानकारी दी गई। ट्रेन स्टाफ ने ही कपलिंग जोडकर मालगाड़ी को आगे पहुंचाया।
संयुक्त जांच आख्या में तीनों सदस्यों ने अपनी अलग-अलग टिप्पणी देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत किया है, लेकिन स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है। जांच समिति में शामिल आरपीएफ का कहना है कि तकनीकी खामी की वजह से कपलिंग खुली थी। घटना में किसी अराजकतत्व के शामिल होने का कोई अंदेशा नहीं है, जिससे केस दर्ज नहीं किया गया है। कैरज एंड वैगन विभाग ने घटना के पीछे असामाजिक तत्व के शामिल होने का इशारा किया। लोको विभाग का मानना है कि जिस समय मालगाड़ी खड़ी थी, उसी समय मालगाड़ी के नीचे से किसी ने ट्रैक के दूसरी तरफ जाने का प्रयास किया और कपलिंग खुल गई होगी।