होली पर इस बार न आना आसान है और न जाना। जिले से होकर गुजरने वाली सभी 40 यात्री ट्रेनों के आरक्षण फुल हो गया हैं। जिन ट्रेनों में वेटिंग मिल रही हैं, उनमें 150 तो किसी में 100 के ऊपर की वेटिंग मिल रही है। यात्रियों को बहुत कम उम्मीद है कि होली पर उनका टिकट कन्फर्म हो पाएगा।
आरक्षण पहले कराने के चक्कर में भी यात्रियों को धक्कामुक्की करनी पड़ रही है। वहीं दिल्ली रूट पर 15 अतिरिक्त बसें चलेंगी। अन्य रूटों पर भी फेरे बढ़ाने की तैयारी है। रोडवेज बसों पर अभी से ही भीड़ उमड़ने लगी है। लोग घंटों बैठे इंतजार करते हैं, लेकिन बसें नहीं मिल पा रही हैं।
हालांकि रोडवेज की ओर से दिल्ली रूट के लिए अतिरिक्त बसें संचालन करने और लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर समेत सभी प्रमुख जिलों के लिए बसों के ट्रिप बढ़ाने की तैयारी है, लेकिन यह सुविधा होली से तीन दिन पहले शुरू होगी।
जिले से होकर पद्मावत एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, देहरादून एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस, पंजाब मेल, अर्चना एक्सप्रेस, नौचंदी एक्सप्रेस, त्रिवेणी एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक समेत अन्य प्रमुख गाड़ियों का संचालन होता है। होली पर हर कोई अपने घर जाना और आना चाहता है।
इसी लिए आरक्षण कराने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंच रहा है। स्टेशन पहुंचने पर यही जवाब मिलता है कि आरक्षण फुल है। वेटिंग मिलेगा। हालात ये हैं कि प्रमुख ट्रेन नीलांचल की वेटिंग 80, काशी विश्वनाथ की 100, पंजाब मेल की 150, अर्चना की 70, से अधिक की वेटिंग चल रही है।
स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार का कहना है कि पदमावत, काशी विश्वनाथ और पंजाब मेल समेत अन्य ट्रेनें हाउसफुल हैं। होली बाद ही ट्रेनों की आरक्षण व्यवस्था पटरी पर आ सकेगी। वहीं यूपी परिवहन निगम की ओर से होली के मद्देनजर यात्रियों को पूरी सुविधा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
निगम की ओर जिले से दिल्ली के लिए वर्तमान में पांच बसें संचालित है। होली पर इनकी संख्या 20 कर दी जाएगी। इसके अलावा इलाहाबाद, कानपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, प्रतापगढ़ के लिए बसों के फेरे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। फिलहाल अतिरिक्त बसें होली से तीन दिन पहले चलेंगी, लेकिन बसों में धक्कामुक्की अभी से शुरू हो गई है।
एआरएम आरपी सिंह का कहना है कि चालक और परिचालकों को ड्यूटी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। होली के पांच दिन पहले और तीन दिन बाद तक आठ दिन लगातार कार्य करने वाले चालक और परिचालक को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इन रूटों पर 24 घंटे बस सेवा उपलब्ध रहेगी, ताकि यात्रियों को दिक्कत न हो।
ट्रेनों के हाउसफुल होने के कारण बसों में भी सीट नहीं मिल पा रही है। वहीं लंबे रूट पर बस यात्रा करने से लोग बच रहे हैं। ऐसे में तत्काल टिकट के जुगाड़ में हर कोई लग गया है। संजय नरनोली, हरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि आरक्षण खिड़की पर सुबह से ही भीड़ लग जाती है।
गोपाल कृष्ण, सुधीर चंद्र शुक्ला का कहना है कि दिल्ली रूट पर चलने वाली ट्रेनें हाउसफुल हैं। परिवार के सदस्यों को आना है। लगता है बस का सहारा लेना पड़ेगा। इन लोगों का कहना है कि बस का सफर बहुत थकान भरा होता है। इसलिए रेल में तत्काल सेवा के लिए प्रयास करूंगा। सफलता न मिलने पर मजबूरी में बस का सहारा लिया जाएगा।