सिविल लाइंस स्थित रायबरेली क्लब में शुक्रवार शाम रीमाकॉन 2017 की शुरुआत हुई। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में एक मंच पर जाने-माने चिकित्सक जुटे। इस दौरान आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने को लेकर मंथन किया गया।
एसजीपीजीआई लखनऊ के निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि हर चिकित्सक का यही प्रयास रहे कि कम खर्च में बेहतर इलाज करे और रोगियों को नई जिंदगी दे। डॉक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है। इसलिए रोगियों के लिए हम सब एक उम्मीद की किरण हैं और उनके इलाज में कोताही न बरती जाए।
मुख्य अतिथि एसजीपीजीआई के निदेशक ने डीएम अनुज कुमार झा और एसपी अब्दुल हमीद के संग रीमाकॉन 2017 का दीप प्रज्ज्वलित करके शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आज डॉक्टरों पर जिम्मेदारी का बोझ बढ़ता जा रहा है। हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने कार्य को बेहतर ढंग से करना है।
कम दवा और कम खर्च पर रोगियों का इलाज किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रयास किया जाए कि कस्बों और देहात क्षेत्रों भी इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डीएम और एसपी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से स्वास्थ्य से संबंधित कई जानकारियां सामने आती हैं।
जिससे इलाज कराने में मदद मिलती है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. केएस सिंह और सचिव डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि रीमाकॉन की थीम सेवा के लिए पढ़ाई (लर्न टू सर्व) है। पहले दिन रायबरेली और बाहरी जिलों के काफी चिकित्सकों ने पंजीकरण कराया।
आईएमए के अध्यक्ष और सचिव के साथ डॉ. मनीष सिंह, डॉ. अल्ताफ हुसैन ने मुख्य अतिथि और डीएमव एसपी को स्मृति चिह्न भेंट किया। लखनऊ से आए डॉ. पुनीत मेहरोत्रा ने बताया कि आज पीलिया की बीमारी एक गंभीर समस्या है। यह सेहत के लिए ठीक नहीं होता है।
आठ से दस फीसदी लोग पीलिया की वजह से जान गंवा देते हैं। यदि किसी को पीलिया है तो वह झाड़फूंक के चक्कर में न पडे़। समय से डॉक्टर के पास जाकर इलाज कराएं। नियमित रूप से इलाज होने पर इस बीमारी से राहत पाई जा सकती है।
केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि घेंघा से संबंधित रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस रोग में गले में गांठ पड़ जाती है। यदि ऐसा किसी व्यक्ति में है तो उसे पहले थायराइड की जांच करानी चाहिए।
घेंघा की वजह से लोगों को कैंसर भी हो सकता है। आज के दौर में देखा जा रहा है कि इस तरह के रोगी इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। पहले लोग ध्यान नहीं देते थे और बाद में यही रोग परेशानी बन जाता है। इसलिए जरूरी होता है कि घेंघा है तो उसका समय से इलाज कराना बहुत जरूरी होता है।
कानपुर से आए डॉ. अनुराग वाजपेयी ने बताया कि अक्सर देखने में आ रहा है कि बच्चों की लंबाई नहीं बढ़ती है, यह सब चिंता का विषय है। यदि लड़की और लड़के की उम्र 10 साल हो गई है, और लंबाई नहीं बढ़ रही है तो इसका इलाज कराना जरूरी होता है। ऐसा न होने से बच्चों की लंबाई नहीं बढ़ पाती है। इसी तरह मोटापा होने पर भी बच्चों का इलाज कराना चाहिए।