रायबरेली में गुरुवार को मधुबन रोड स्थित सड़क किनारे एक दुकान में बिकने के लिए रखे छाटे सिलेंडर।
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जिले में छोटे गैस सिलेंडरों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। अफसरों की आंख में धूल झोंककर खुलेआम छोटे सिलेंडर के रूप में मौत सामान बिक रहा है। जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से बचते रहते हैं। आज तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी ही हुई है।
जिले में विभिन्न कंपनियों के 37 गैस एजेंसियां हैं। इसमें घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ता करीब एक लाख 90 हजार हैं। शासन की ओर से इन्हीं एजेंसियों से ही पांच किलोग्राम के छोटे सिलेंडरों की बिक्री कराई जाती है। इसमें बकायदा कनेक्शन दिया जाता है।
बावजूद इनकी संख्या बमुश्किल 200 पंजीकृत है। जानकारी के अभाव में लोग बाजार से खुलेआम सिलेंडर खरीद रहे हैं, जो मानकों के विपरीत होते हैं। यहीं नहीं सिलेंडरों की रिफ्लिंग भी दुकान के अंदर कर दी जाती है। इससे छोटे सिलेंडरों की सेफ्टी पिन को नुकसान पहुंचता है।
साथ ही गैस रिसाव का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं अफसर सिर्फ खानापूरी करने में लगे हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की सेल्स एरिया मैनेजर कंपनी की ओर से सभी एजेंसियों में पांच किलोग्राम के छोटे सिलेंडर उपलब्ध हैं।
इसके कनेक्शन के लिए करीब एक हजार रुपये जमा करने पड़ते हैं। यह सिलेंडर मानकों पर पूरी तरह तैयार होता है। एक साल में 34 सिलेंडर देने का प्रावधान है। प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि छोटे सिलेंडरों को लेकर अभियान चलाया जाता है।
पिछले महीने गैस रिफ्लिंग में दो दुकानदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा सभी आपूर्ति निरीक्षकों को भी इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। मानक के विरुद्ध सिलेंडरों की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।