शारदीय नवरात्र को लेकर लोगाें में जहां उत्साह है। वहीं फलाहारी सामग्रियों के दाम अभी से बढ़ने शुरू हो गए हैं। फलों के दामों ने आसमान छूना शुरू कर दिया है। नवरात्र 1 अक्तूबर से प्रारंभ होगा। इसका असर अभी से दिखने लगा है।
ज्यादातर फलों में 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। मेवा में कुछ राहत जरूर मिली है। ऐसे में भक्तों को सोच समझकर खरीदारी करनी पड़ेगी। खासतौर पर मध्यम और गरीब वर्ग के लोगों को अपने बजट पर ज्यादा ध्यान देना होगा। ऐसा नहीं कि बाजार में फल कम हैं। नवरात्र में डिमांड बढ़ जाने के कारण महंगाई और अधिक होने की संभावना है।
शारदीय नवरात्र पर फल के साथ दूध और फलाहारी खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ जाते हैं। वर्तमान में दूध के दाम में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। पिछली बार दूध 30 रुपये प्रति लीटर था। वहीं इस बार 40 से 50 रुपये प्रति लीटर तक हो गया है।
ऐसे में सस्ती वस्तुओं से ही काम चलाना पड़ेगा। फल काफी महंगे हो गए हैं। ऐसे में लोगाें को काफी सोच-समझ कर खरीददारी करनी पड़ेगी। रेनू और सुर्कीति का कहना है कि हर साल महंगाई से जूझना पड़ता है। इसके बावजूद आस्था पर कभी असर नहीं पड़ा है।
नौ दिन व्रत के दौरान सोच-समझकर खरीदारी की जाती है। प्रतीक और अमरकांत वाजेपयी का कहना है कि महंगाई के लिए काफी हद तक प्रशासन जिम्मेदार है। नवरात्र में डिमांड होती है। ज्यादातर व्यापारी सामग्री स्टोर भी कर लेते हैं। बाद में त्योहार का फायदा उठाकर दाम बढ़ा देते है।
फल दुकानदार नवीन सोनकर, जितेंद्र सोनकर का कहना है कि बारिश से फल के दाम में बढ़ोत्तरी हुई है। सेब, अनार, मुसम्मी के दाम बढ़े हैं, तो केला ने राहत दी है। बाढ़ के कारण फलों के दाम बढ़ा है। नवरात्र में डिमांड भी अधिक होती है।
इसके दौरान कीमत और अधिक बढ़ने की संभावना है। वहीं व्यापारी कृष्ण गोपाल कसौंधन, शिव प्रसाद गुप्ता का कहना है कि पिछले वर्ष सूखा होने के कारण महंगाई अधिक थी। इस बार मेवे के दाम कम हुए हैं।