जिले में मंगलवार को हुई बारिश रबी की फसल के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। गेहूं, चना, मटर की फसल को जबरदस्त फायदा हुआ है। इससे तीन लाख 85 हजार किसानों के चेहरे खिल गए।
खास बात ये है कि तेज बारिश होती तो सरसों की फसल गिरने से नुकसान की गुंजाइश होती है, लेकिन बारिश रुक-रुककर धीमी गति से हुई। कृषि विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिक बारिश को फसलों के लिए अच्छा मान रहे हैं।
धूप निकलने के कारण खेत की नमी भी जा रही थी। अचानक मौसम बदलने और बारिश होने से रबी की फसल को फायदा हुआ है। गेहूं, चना, सरसों की फसल के लिए बारिश फायदेमंद है।
इस बार सूखा पड़ने के कारण इस बार किसानों ने रबी की फसल की बोआई भी देर से की थी। ऐसे में चना, सरसों की फसल छोटी है, जिससे फसल के गिरने की भी गुंजाइश नहीं है।
कुछ किसानों ने निजी नलकूप से सिंचाई करके सरसों की फसल की बोआई की थी, जो बड़ी हो गई है। बारिश इतनी तेज नहीं हुई कि जिससे सरसों की फसल को नुकसान हो।
सही मायने में इस बारिश से फसलों को फायदा हुआ और अन्नदाताओं के चेहरे पर खुशी देखी जा सकती है। उनका कहना है कि बारिश हो जाने के कारण अब फसलों में पाला लगने की गुंजाइश भी खत्म हो गई है।
पाला लगने के कारण फसलों को नुकसान होता है, लेकिन इस बारिश से न सिर्फ फसलों की सिंचाई हो गई है, बल्कि पाला लगने का झंझट दूर हो गया है।
आलू की फसल भी अच्छी होने की उम्मीद है। अधिकारियों की मानें तो पाला न लगने के कारण निश्चित तौर से फसल उत्पादन बढ़ेगा।
राही ब्लॉक क्षेत्र के किसान सुरेंद्र कुमार, अजय कुमार और जगतपुर क्षेत्र के किसान केके पासवान, रमेश कुमार का कहना है कि बारिश से गेहूं, चना, मटर समेत अन्य फसलों को फायदा हुआ है।
पाला भी अब फसलों में नहीं लगेगा। इसी तरह कुछ दिन तक मौसम और रहेगा तो फसलें अच्छी होंगी और उत्पादन भी अधिक होगा। पानी बिना फसलें सूख रही थी, लेकिन बारिश से जबरदस्त फसलों को फायदा हुआ है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके तिवारी ने बताया कि कड़ाके की ठंड और बारिश रबी की फसल के लिए सोने पर सुहागा है। बारिश से सभी फसलों गेहूं, चना, मटर, सरसों की फसल को फायदा हुआ है।
फसलों पर पाला लगने का खतरा भी कम हो गया है। मौसम इसी तरह रहा तो निश्चित तौर से फसल उत्पादन बढे़गा। कम बारिश हुई है, जिससे सरसों की फसल को भी नुकसान नहीं हुआ है।
हालांकि अधिक दिन तक बदली रही तो पहले बोई गई सरसों की फसल में फूल निकलने में असर पड़ सकता है। यदि तेज बारिश हो जाए तो किसान जिन खेत में चना, सरसों की फसल बोई है, उसका पानी बाहर निकाल दें।