रायबरेली। भीषण गर्मी में छंटनी किए गए कर्मियों की कमी भले ही अभियंताओं को नहीं खल रही है, लेकिन उपभोक्ता जरूर परेशान हैं। लाइनों के फॉल्ट समय से ठीक नहीं हो पाते हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में बिजली के लिए त्राहि-त्राहि है। बारिश और हवा चलने पर बिजली गुल हो जाती है। रात में यदि कहीं फॉल्ट आता है, तो वह दूसरे दिन ही ठीक हो पाता है। रात में फॉल्ट खोजने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है।
जिले में 54 विद्युत उपकेंद्रों पर करीब 1100 कर्मियों की तैनाती थी। शहर में प्रति उपकेंद्र 36 और ग्रामीण क्षेत्र के उपकेंद्रों में 20 कर्मियों की तैनाती थी, लेकिन वर्तमान समय में 36 कर्मियों की जगह 19 व ग्रामीण क्षेत्र में 20 की जगह 13 कर्मियों की तैनाती है। कर्मियों की कमी से न तो बिजली की लाइनों पर रखी डालियों की कटाई हो पाती, न हीं उपकेंद्राें की ठीक से देखरेख होती है।
यही वजह है कि आए दिन कहीं न कहीं की बिजली गुल रहती है। ग्रामीण क्षेत्र के हालात सबसे ज्यादा खराब है। विद्युत उपकेंद्र कठगर, बरस, लालगंज, सरेनी, मल्केगांव, सेमरी, खीरों उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को 18 घंटे में महज 10 घंटे बिजली मिल पा रही है। रात में फॉल्ट आता है, तो दूसरे दिन ठीक होता है।
उपभोक्ता रामजियावन, रतीपाल, आशुतोष ने बताया कि इस समय धान की रोपाई चल रही है। नहरों में पानी नहीं आ रहा है। बिजली भी दगा दे रही है। कई टुकड़ों में 10 घंटे बिजली मिल रही है। मुख्य अभियंता रामकुमार ने बताया कि लाइनों पर पेड़ की डालियों की छंटाई के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। फॉल्ट आने पर उसे तुरंत ठीक करने के दिशा निर्देश दिए गए हैं।